अब निजी अस्पतालों को देना होगा नर्स को न्यूनतम 20 हजार वेतन, स्वास्थ्य महानिदेशक ने दिया आदेश

Spread the love

राजधानी लखनऊ के सभी निजी अस्पतालों को अब अपने यहां नर्स को प्रति माह न्यूनतम 20 हजार रुपये वेतन देना होगा। स्वास्थ्य महानिदेशक ने सीएमओ को पत्र भेजकर इस आदेश का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। कम वेतन देने वाले अस्पतालों के खिलाफ शिकायत मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

सीएमओ डॉ. एनवी सिंह का कहना है कि जिले के सभी निजी अस्पतालों को इस संबंध में ईमेल भेज दिया गया है। आदेश का सख्ती से पालन करने के लिए निर्देश भी दिए गए हैं। राजधानी में एक हजार से अधिक छोटे-बड़े निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इसमें 10 से 50 बेड के करीब 84, जबकि 51 से 100 बेड तक के करीब 30 अस्पताल हैं।

मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया

निजी अस्पतालों में नर्स को 10 से 12 हजार रुपये वेतन देकर 08 से 10 घंटे तक काम लिया जाता है। नर्सिंग स्टाफ को कम मानदेय या वेतन दिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया था। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को आदेश दिया कि निजी अस्पतालों में नर्स को न्यूनतम 20 हजार रुपये वेतन दिलाने की व्यवस्था कराएं।

कोर्ट के आदेश की कॉपी शासन के जरिये स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण के पास पहुंची तो उन्होंने सीएमओ लखनऊ को पत्र भेजकर इसका सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह के मुताबिक, 10 से 100 बेड तक के सभी निजी अस्पतालों को अब न्यूनतम 20 हजार रुपये वेतन नर्स को देना होगा।

और पढ़े  अयोध्या- हनुमानगढ़ी उज्जैनिया पट्टी के नए महंत बने संदीप दास और मोहित श्रीवास्तव को पट्टी का मुख्तार चुना गया।

मॉनिटरिंग सेल बनेगी 

सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि नर्स को निर्धारित न्यूनतम वेतन मिले, इसके लिए एक मॉनिटरिंग सेल बनाई जाएगी जो निजी अस्पतालों की जांच करेगी। पंजीकरण के वक्त अस्पतालों की ओर से नर्सिंग व अन्य स्टाफ का रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। यह सेल नर्सों से संपर्क कर वेतन संबंधी
जानकारी जुटाएगा।

लाइसेंस भी किया जाएगा निरस्त 

सीएमओ का कहना है कि नर्स को कम मानदेय देने के आरोप यदि जांच में सही मिले तो अस्पताल का लाइसेंस भी निरस्त किया जाएगा। इसके लिए सभी प्रमाण जरूरी होंगे जिससे न्यायालय के आदेश की अवहेलना का हवाला देकर लाइसेंस निरस्त करने में किसी तरह की कोई अड़चन न आए।

ये भी हैं चुनौतियां

  • बहुत से निजी अस्पताल अपने यहां नर्स की भर्ती प्रशिक्षु (ट्रेनी) के तौर पर करते हैं, जिससे उन्हें वेतन देने की बाध्यता नहीं रहती। उन्हें मानदेय के नाम पर पांच से दस हजार रुपये का भुगतान किया जाता है।
  • निजी अस्पतालों के संचालन में बड़े और पहुंच वाले लोग शामिल होते हैं। बहुत से मामलों में पंजीकरण निरस्त होने के बाद भी अस्पताल चलते रहे और सीएमओ भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सके। ऐसे अस्पतालों में मनमानी रोकना कठिन होगा।
  • बहुत से निजी अस्पताल अपनी शर्तों पर नर्स को नौकरी देते हैं। शर्त यह होती है कि वह हर माह तय वेतन तो देंगे, लेकिन जहां भी कहेंगे नर्स को हस्ताक्षर करना होगा। ऐसे अस्पताल ज्यादा रकम पर हस्ताक्षर कराते हैं। इससे रिकॉर्ड में कम वेतन भुगतान पकड़ पाना मुश्किल होता है।
और पढ़े  16 साल की बेटी से पिता ने किया दुष्कर्म, 6 माह की गर्भवती होने पर पता चला

Spread the love
  • Related Posts

    हैवानियत- मुजफ्फरनगर में परेशान 23 साल की बहू ने 67 वर्ष के ससुर का प्राइवेट पार्ट काटा

    Spread the love

    Spread the loveउत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में शुक्रवार को एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जहां एक महिला ने अपने 67 वर्षीय ससुर पर धारदार हथियार से हमला कर दिया।…


    Spread the love

    CM Yogi-: गाजियाबाद के दुग्धेश्वर नाथ मंदिर पहुंचे CM योगी आदित्यनाथ, पूजा-अर्चना की

    Spread the love

    Spread the love सीएम योगी आदित्यनाथ आज गाजियाबाद के दुधेश्वर नाथ मंदिर पहुंचे। योगी आदित्यनाथ ने मंदिर पहुंच कर पहले जलाभिषेक किया उसके बाद महंत नारायण गिरी ने पटका पहना…


    Spread the love