सुविधाओं का अभाव- 60 घरों पर लटके हुए है ताले, 200 के सिर्फ बुजुर्ग रखवाले, न तो रोजगार न ही  शिक्षा…जंगली जानवरों का डर अलग

Spread the love

 

 

ड़क, स्वास्थ्य और स्कूल जैसी सुविधाओं का अभाव गांवों में सुनसानी का सबसे बड़ा कारण है। रही सही कसर जंगली जानवरों ने पूरी कर दी, जिनके आतंक से खेत-खलिहान बंजर पड़े हैं। ग्रामीण खेतों में जो भी बोते हैं, बंदर और जंगली सुअर उसे चौपट कर जाते हैं। ऐसे में सुविधा के संसाधनों की कमी से जूझ रहे लोगों को दो वक्त की रोटी की तलाश में अपने घरों पर ताला लगाकर पलायन करना पड़ रहा है। ऐसी ही स्थिति पिथौरागढ़ की दूरस्थ तहसील बंगापानी की ग्राम पंचायत जारा जिबली की है। यहां के ग्रामीण रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पलायन कर गए हैं। कभी गांव में 400 परिवार रहा करते थे। बीते कुछ वर्षों में गांव करीब आबादी पलायन कर चुकी है। करीब साठ घरों पर ताले लटके हैं। जिन घरों में चूल्हा जल भी रहा है तो उनमें से करीब 200 ऐसे हैं, जहां बुजुर्ग केवाड़ खोले हमेशा अपने बच्चों की राह ताकते रहते हैं। ….

 

छह तोकों से मिलकर बना है जारा जिबली
यहां बैकोट, जिबली, जारा, दैधार, देवथल और बाननी मिलाकर छह तोक हैं। पहले यहां करीब 1800 से 2000 लोग रहते थे, जो अब करीब छह से सात सौ तक रह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के हर एक तोक में पानी, जमीन और जंगल हैं। बावजूद इसके सरकारी सुविधाओं के अभाव में गांव से साल-दर-साल लोग पिथौरागढ़, हल्द्वानी और रुद्रपुर आदि जगहों की ओर पलायन कर रहे हैं।

 

और पढ़े  देहरादून- 14 महिलाओं को तीलू रौतेली और 35 को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार, CM धामी ने किया सम्मानित

रोजगार, जंगली जानवर पलायन की बड़ी वजह
400 से अधिक परिवारों वाले इस गांव के अधिकतर लोग रोजगार की तलाश में शहरों की ओर चले गए। आज इन छह तोकों में सुनसानी है। गांव में पलायन का मुख्य कारण जंगली जानवर, रोजगार और अच्छी शिक्षा नहीं मिल पाना है। किसान अपने खेतों में जो भी बोते हैं, बंदर और जंगली सुअर उसे बर्बाद कर जाते हैं। लोगों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता है इसलिए उन्हें पढ़ाने के लिए भी वे शहरों का रुख कर रहे हैं।

60 फीसदी से अधिक भूमि पड़ी है बंजर
बंगापानी तहसील से मिले आंकड़ों के अनुसार जारा जिबली के ग्रामीणों के पास (8050 नाली 11 मुट्ठी) आठ हजार पचास नाली और 11 मुट्ठी जमीन खेती करने योग्य है। ग्रामीणों की माने तो गांव में हुए पलायन से लगभग 60 फीसदी भूमि बंजर हो गई है। उनके लिए आजीविका का एकमात्र जरिया खेतीबाड़ी या मजदूरी था। 15 साल पहले तक गांव में प्रत्येक परिवार मक्के की खेती को लेकर उत्सुक रहता था। जंगली जानवर इन्हें खत्म करने लगे तो लोगों ने खेती करनी छोड़ दी। कई लोग अभी भी इन फसलों को बो रहे हैं। लेकिन जंगली जानवर उन्हें छुड़वाने के लिए मजबूर कर रहे हैं। आजीविका के लिए मातृभूमि को छोड़ना शुरू कर दिया।

 

 

स्कूल हैं, बच्चे हैं लेकिन शिक्षक नहीं
गांव के प्रत्येक तोक में राजकीय प्राथमिक विद्यालय और गांव के मध्य एक हाईस्कूल भी है। हाईस्कूल में 117 छात्र संख्या होने के बावजूद भी शिक्षकों का अभाव है। विद्यालय में नौ पदों के सापेक्ष अंग्रेजी, कला और गणित के पदों पर शिक्षक की तैनाती नहीं हो पाई है। इंटर की पढ़ाई के लिए अभिभावकों को अपने बच्चों को 19 किमी दूर बंगापानी या पिथौरागढ़ भेजना पड़ता है। गांव में हाईस्कूल को उच्चीकृत कर इंटरमीडिएट बनाए जाने का प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है। सबसे बूरे हाल राजकीय प्राथमिक विद्यालयों की है। ग्रामीणों की माने तो गांव में करीब 200 से अधिक छोटे-छोटे बच्चे हैं। लोगों ने प्राथमिक स्तर की शिक्षा व्यवस्था को देखते हुए करीब 120 बच्चों को गांव से बाहर भेजा है। पूरे गांव के छह प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 60 से 70 ही बच्चे बचे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि अभी भी शिक्षा व्यवस्था ठीक रही तो अभिभावक अपने बच्चों को वापस गांव में लाने को तैयार हैं।
गांव की सड़क भी बदहाल
वैसे तो तहसील मुख्यालय से जारा जिबली के लिए पीएमजीएसवाई के तहत 19 किमी पक्की सड़क बनाई गई है। ठेकेदारों ने देवीधार, खड़ीगाड़, रामर, हुमकट्या, बमौती, गड्डार आदि जगहों पर डामरीकरण नहीं किया है। इसके अलावा सड़क अन्य जगहों पर भी गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। सड़क से ट्रैकर और पर्यटक छिपला केदार दर्शन के लिए आवाजाही करते हैं। सड़क बदहाल होने से पर्यटकों की आवाजाही कम करने लगे है। इससे ग्रामीणों के रोजगार पर भी प्रभाव पड़ रहा है।

और पढ़े  मल्लिकार्जुन खरगे- खरगे का BJP पर निशाना, बोले- चुनाव के समय ही नहीं, जरूरत पर कार्यकर्ताओं के बीच आते हैं

एकमात्र आयुर्वेदिक अस्पताल 19 किमी दूर
ग्रामीणों के इलाज के लिए सड़क से 19 किमी दूर मवानी-दवानी में एकमात्र आयुर्वेदिक अस्पताल है। बीते साल जुलाई 2024 से अस्पताल में चिकित्सक नहीं है। फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल चल रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर मरीजों को 100 किमी दूर जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है।

ग्रामीणों की पीड़ा
जंगली जानवर, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में लोग गांव से पलायन कर रहे हैं। जानवरों से परेशान होकर खेती करनी छोड़ दी है। सरकार को इन समस्याओं का समाधान करना चाहिए। – फकीर सिंह,
किसान।

मैंने लगातार किसानी कर आजीविका कमाई है। जंगली जानवर खेतों में बोई गई फसल को नष्ट कर रहे हैं। इससे नुकसान झेलना पड़ रहा है। तमाम चुनौतियों के बीच खेतीबाड़ी करनी पड़ रही है। – लाल सिंह धामी, किसान।

रोजगार के लिए युवाओं ने घरों को छोड़ दिया है। बंदर घर के अंदर से ही खाना उठा रहे हैं। सरकार को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं बढ़ाने के साथ ही रोजगार के लिए ठोस पहल करनी चाहिए। – रूप सिंह धामी, ग्रामीण।

सरकार ने जंगली जानवरों की रोकथाम और सिंचाई की व्यवस्था करनी चाहिए। गांव में पानी होने के बावजूद भी किसानों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। सरकार काम करेगी तो पलायन रुकेगा। – भगत सिंह धामी, ग्रामीण।

गांव से पलायन को रोकने के हर संभव प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए प्रशासन स्तर पर उचित योजनाएं बनाकर ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे। – मंजीत सिंह एसडीएम धारचूला

 


Spread the love
  • Related Posts

    भीमताल- ओखलकांडा में भीषण सड़क हादसा: कैंटर खाई में पलटा, 1 की मौत, सहायक कृषि अधिकारी सहित तीन घायल

    Spread the love

    Spread the loveभीमताल के ओखलकांडा में सोमवार दोपहर 1.30 बजे एक कृषि विभाग के उपकरण लेकर आ रहा कैंटर अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा पलटा। कैंटर के खाई में…


    Spread the love

    अल्मोड़ा Accident: कोसी के पास कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिरी, एक की मौत, दो घायल

    Spread the love

    Spread the loveअल्मोड़ा में कोसी के पास एक कार अनियंत्रित होकर करीब 80 फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो लोग…


    Spread the love