केदारनाथ उपचुनाव : भाजपा ने पूर्व विधायक आशा नौटियाल को प्रत्याशी घोषित किया,जानें कैसी रही है अब तक सियासी पारी

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बीजेपी ने रविवार को केदारनाथ उपचुनाव के लिए पूर्व विधायक आशा नौटियाल को प्रत्याशी घोषित किया है। बता दें कि आशा बीजेपी से पहले भी विधायक रह चुकी हैं। वर्तमान में आशा नौटियाल भाजपा महिला मोर्चे की अध्यक्ष हैं। इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने पूर्व विधायक मनोज रावत को उम्मीदवार घोषित किया है।

13 दावेदारों में से मनोज को प्रत्याशी घोषित किया
कांग्रेस हाईकमान ने 13 दावेदारों में से मनोज को प्रत्याशी घोषित किया। सोमवार को जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग में मनोज रावत नामांकन करेंगे। जिसमें पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता समर्थन में मौजूद रहेंगे।अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रत्याशी की घोषणा की। मनोज रावत ने पहली बार 2017 में केदारनाथ विधानसभा सीट से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद दूसरी बार 2022 विस का चुनाव हार गए। मनोज 12557 मत लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे।

 

कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व सीएम हरीश रावत, गणेश गोदियाल, विधायक प्रीतम सिंह समेत अन्य नेताओं की पैरवी से मनोज रावत ने टिकट पाने में बाजी मारी।

प्रदेश उपाध्यक्ष संगठन एवं प्रशासन मथुरादत्त जोशी ने कांग्रेस प्रत्याशी मनोज रावत 28 अक्तूबर नामांकन करेंगे। इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, राष्ट्रीय सचिव एवं प्रदेश सहप्रभारी सुरेंद्र शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, गणेश गोदियाल, डॉ. हरक सिंह रावत समेत पार्टी के विधायक, पूर्व विधायक व अन्य पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।

उत्तराखंड राज्य बनने के बाद वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में वह केदारनाथ विस की पहली विधायक चुनी गईं, तब वह भाजपा से प्रत्याशी थीं।

वर्ष 2007 में भी उन्हें क्षेत्रीय जनता ने अपना विधायक चुना था। इसके बाद दो बार चुनाव में उन्हें पराजय मिली। ऊखीमठ विकासखंड के दिलमी गांव निवासी आशा नौटियाल एक सामान्य परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पति रमेश नौटियाल पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं। वह वर्ष 1996 में पहली बार ऊखीमठ वार्ड से निर्विरोध जिला पंचायत सदस्य चुनी गईं।

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इसके बाद वर्ष 1997-98 में उन्हें भाजपा ने जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी और वर्ष 1999 में उन्हें महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष चुना गया। सौम्य व्यवहार और निरंतर जनसंपर्क की वजह से वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में आशा नौटियाल को भाजपा ने केदारनाथ विस से प्रत्याशी बनाया और वह विजयी हुईं। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी दिवंगत विधायक शैलारानी रावत को पराजित किया था।

आशा नौटियाल की जब पुन: पार्टी में हुई वापसी
वर्ष 2007 में भी भाजपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर सिंह नेगी को पराजित कर विजयश्री हासिल की। वर्ष 2012 में लगातार तीसरी बार वह भाजपा की प्रत्याशी घोषित हुईं, पर इस बार उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी शैलारानी रावत से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वर्ष 2016 में शैलारानी रावत भाजपा में शामिल हो गईं और वर्ष 2017 में भाजपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी बना दिया, जिस पर आशा नौटियाल ने पार्टी से बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा और तीसरे स्थान पर रहीं। तब, कांग्रेस से मनोज रावत विधायक चुने गए और निर्दलीय कुलदीप रावत दूसरे स्थान पर रहे।

कुछ समय बाद आशा नौटियाल की पुन: पार्टी में वापसी हुई और वह क्षेत्र में सक्रिय हो गईं। वर्ष 2022 में पार्टी ने पुन: शैलारानी रावत को प्रत्याशी बनाया और वह जीत गईं। वहीं, आशा नौटियाल को महिला मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया, जिसके बाद वह सीधे हाईकमान के संपर्क में आ गईं। इस बार सदस्यता अभियान में भी वह गांव-गांव संपर्क करती दिखीं। विस क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।

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