पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सरकार का बड़ा कदम…

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श्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने रसोई गैस की आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने देश की तेल रिफाइनरियों को एलपीजी यानी रसोई गैस का उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाए। सरकार का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया का संकट और गहराता है तो ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, इसलिए पहले से तैयारी जरूरी है।

 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है। भारत अपनी बड़ी एलपीजी जरूरत आयात से पूरी करता है और इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। इसी वजह से सरकार ने रिफाइनरियों को अधिक एलपीजी उत्पादन करने और अतिरिक्त गैस को घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता क्यों दी गई?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होती है तो सबसे पहले घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरत पूरी की जाएगी। इसी उद्देश्य से घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच 25 दिनों का अंतर अनिवार्य किया गया है। यह कदम जमाखोरी और घबराहट में ज्यादा सिलेंडर बुक करने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए उठाया गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?
भारत की बड़ी मात्रा में एलपीजी और कच्चा तेल पश्चिम एशिया से आयात होता है। इन आपूर्तियों का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने पर इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ जाता है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है।

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उद्योग और होटल सेक्टर पर क्या असर पड़ सकता है?
सरकार ने गैर-घरेलू एलपीजी आपूर्ति की भी समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार होटल, रेस्तरां और उद्योगों को मिलने वाली गैस की आपूर्ति पर नजर रखी जा रही है। यदि स्थिति और बिगड़ती है तो घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए इन क्षेत्रों में आपूर्ति सीमित की जा सकती है। हालांकि अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों जैसे जरूरी क्षेत्रों को गैस की आपूर्ति जारी रखी जाएगी।

सरकार की आगे की रणनीति क्या है?
सरकार फिलहाल एलपीजी उत्पादन बढ़ाने, वितरण व्यवस्था को सख्त करने और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम कर रही है। साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि रसोई गैस देश के करोड़ों परिवारों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी है, इसलिए सरकार इस आपूर्ति को किसी भी हालत में प्रभावित नहीं होने देना चाहती।


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