सेना के लिए ड्रोन विकसित करने के नाम पर 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने का बहुतकनीकी संस्थान बड़ू के छात्र सर्वेश शर्मा का दावा सवालों के घेरे में आ गया है। डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (डीआईओ) ने स्पष्ट किया है कि उनके आधिकारिक रिकॉर्ड में सर्वेश या उनसे जुड़े किसी स्टार्टअप को ऐसी कोई ग्रांट मंजूर होने का उल्लेख नहीं है। प्रारंभिक जांच में साइबर ठगी की आशंका सामने आने के बाद सदर थाना हमीरपुर में एफआईआर दर्ज की गई है। हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा विभाग ने भी मामले की जांच शुरू कर संस्थान प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। कॉलेज प्रबंधन को 15 अक्तूबर को सेना की ओर से फोन आया था, जिसके बाद मामले की पड़ताल शुरू की गई। 27 अक्तूबर को सेना के अधिकारियों ने छात्र का रिकॉर्ड मांगा। इसके बाद अधिकारियों ने सर्वेश से भी बातचीत की है।
किसी छात्र या परियोजना को सरकारी अथवा संस्थागत आर्थिक सहायता मिलने की खबर महत्वपूर्ण होती है। ऐसी जानकारी प्रकाशित या साझा करने से पहले संबंधित संस्था की आधिकारिक पुष्टि करना जरूरी है।सर्वेश शर्मा के मामले में आईडेक्स डीआईओ के स्पष्टीकरण के अनुसार, 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर होने का दावा फर्जी है। इसलिए इस राशि को छात्र को मिली स्वीकृत आर्थिक सहायता के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।








