हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों के पिघलने से होने वाले बदलावों का आकलन अब भूजल स्तर, तापमान और पानी के बहाव से जुड़े आंकड़ों के आधार पर भी किया जाएगा। केंद्रीय भूजल बोर्ड के वैज्ञानिक डॉ. संजय पांडे के निर्देश पर हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिले में 20 स्थानों पर मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित करने का काम शुरू कर दिया है। इन उपकरणों के माध्यम से जुटाया गया रियल टाइम डाटा केंद्रीय सर्वर तक पहुंचेगा, जहां वैज्ञानिक इसका विश्लेषण कर सकेंगे। ग्लेशियरों और उनसे बनने वाली झीलों की निगरानी पहले से की जा रही है।
डिजिटल रिकॉर्डर से दर्ज होंगे बदलाव
मॉनिटरिंग सिस्टम में डिजिटल वॉटर लेवल रिकॉर्डर और पीजोमीटर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। बोरहोल में लगाए जाने वाले सेंसर पानी के दबाव को मापकर भूजल स्तर में होने वाले बदलावों की जानकारी देंगे। टेलीमेट्री सिस्टम की मदद से यह डाटा मोबाइल नेटवर्क या अन्य संचार माध्यमों के जरिए केंद्रीय सर्वर तक भेजा जा सकेगा।








