हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों पर बढ़ते कचरे और प्रदूषण को लेकर राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने चिंता जताई है। हिंदी पार्श्व गायिका सोना महापात्रा की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि इस विषय पर बाहरी लोगों के सोचने से पहले स्थानीय लोगों को विचार करने की जरूरत है। प्रदेश को अपने घर की तरह स्वच्छ रखने का प्रयास किया जाना चाहिए।
राज्यपाल बुधवार को लोकभवन में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति सत्य प्रकाश बंसल की पुस्तक ‘अक्षर से आत्मबोध तक’ के लोकार्पण के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने स्वच्छता, पर्यटन, भाषा, नौतोड़ और नौणी विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।
कचरे से प्रभावित होती है पहाड़ों की सुंदरता
राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि किसी बाहरी व्यक्ति के चिंता जताने से पहले स्थानीय लोगों को हिमाचल को अपना घर समझकर इसकी स्वच्छता के बारे में सोचना चाहिए। कचरे के कारण प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता प्रभावित होती है और बाहर से आने वाले लोगों के बीच भी गलत संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को स्वच्छ रखने से पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। इसके लिए प्रदेश सरकार के साथ-साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी है।
राष्ट्रीय एकता में महत्वपूर्ण है भाषा
‘अक्षर से आत्मबोध तक’ पुस्तक के लोकार्पण पर राज्यपाल ने लेखक सत्य प्रकाश बंसल को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पुस्तक त्रिभाषा सूत्र पर केंद्रित है और नई शिक्षा नीति में इसे मजबूती से शामिल करने की आवश्यकता है।
राज्यपाल ने कहा कि भाषा राष्ट्रीय एकता का महत्वपूर्ण घटक है। शिक्षण संस्थानों में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्थानीय भाषाओं की लिपि तैयार करने की जरूरत पर भी जोर दिया और कहा कि ऐसा नहीं होने पर इन भाषाओं के लुप्त होने का खतरा है।








