Health: बीमारी का डर छोड़िए, बीमा का हाथ पकड़िए, IRDAI के सख्त नए नियमों से बढ़ रहा भरोसा

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जीएसटी खत्म होने से हेल्थ इंश्योरेंस लेना सस्ता तो हुआ, लेकिन IRDAI के नए नियमों से क्लेम प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी हुई है और कंपनियों के लिए नियम सख्त किए गए हैं। इससे यह भरोसा बढ़ता है कि जरूरत के समय आपको सही मदद मिलेगी। हेल्थ इंश्योरेंस में नए बदलावों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब पॉलिसीधारक ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगे।

 

रामलाल जी बड़े सयाने हैं। पिछले महीने घुटनों के ऑपरेशन की नौबत आई, तो बड़े परेशान थे। परेशानी दर्द की कम, इसकी ज्यादा थी कि जो हेल्थ इंश्योरेंस उन्होंने 5 साल पहले लिया था, क्या वह इसका खर्च उठाएगा? या फिर ‘पुरानी बीमारी’ कहकर हाथ खड़े कर देगा?

हाल ही में जब रामलाल जी पार्क में मिले, तो उनके चेहरे पर वैसी ही चमक थी जैसी दिवाली के बोनस पर होती है। उन्होंने बताया, नियम बदल गए हैं! अब कंपनी न तो बहाने बना सकती है और न ही हमें वर्षों इंतजार करवा सकती है। रामलाल को यह राहत असल में भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के उन नए नियमों की देन है, जिन्होंने आम आदमी के लिए इलाज की राह आसान कर दी है।

आइए, समझते हैं कि अब आपकी जेब और सेहत कितनी सुरक्षित है।

अब लंबा इंतजार नहीं
अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज या ब्लड प्रेशर जैसी पहले से मौजूद बीमारियां होती थीं, तो उन्हें हेल्थ इंश्योरेंस में कवर मिलने के लिए लगभग 4 साल तक इंतजार करना पड़ता था। यह लंबा इंतजार कई लोगों को पॉलिसी लेने से ही निराश कर देता था। अब इस नियम में राहत देते हुए इंतजार की अधिकतम अवधि घटाकर 3 साल कर दी गई है। अगर आप आज पॉलिसी लेते हैं, तो कम समय में ही अपनी मौजूदा बीमारी के इलाज के लिए कवर मिलना शुरू हो जाएगा। यह बदलाव खासतौर पर उन लोगों के लिए बड़ी राहत है, जो अब तक यह सोचकर पॉलिसी लेने से बचते रहे हैं कि उनके लिए बहुत देर हो चुकी है।

5 साल बाद क्लेम पर ज्यादा भरोसा
अक्सर लोग हेल्थ इंश्योरेंस लेने से इसलिए पीछे हट जाते हैं, क्योंकि एक डर रहता है, कहीं जरूरत के समय कंपनी क्लेम ही न ठुकरा दे। लेकिन अब यह डर काफी हद तक खत्म हो गया है। अगर आपने पॉलिसी लगातार 5 साल तक ईमानदारी से जारी रखी है, तो उसके बाद बीमा कंपनी छोटी-छोटी वजहों का हवाला देकर आपका क्लेम रिजेक्ट नहीं कर सकती। अब सिर्फ उन्हीं मामलों में दावा रोका जाएगा, जहां गलत जानकारी दी गई हो या किसी तरह की धोखाधड़ी हुई हो।

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 पुरानी बीमारियों पर कम कन्फ्यूजन
“प्री-एग्जिस्टिंग बीमारी” शब्द ही लोगों को उलझा देता था। क्या कवर होगा, कब होगा? यह समझना आसान नहीं था। अब नियम ज्यादा साफ और सरल हैं। वेटिंग पीरियड कम हुआ और शर्तें भी स्पष्ट हैं। इससे पॉलिसी लेते समय ही समझ सकते हैं कि आपको क्या मिलेगा और कब मिलेगा।
55 के बाद क्यों जरूरी है

दोबारा सोचना?
अक्सर हम एक बार पॉलिसी लेकर उसे वर्षों तक वैसे ही चलाते रहते हैं। लेकिन क्या वह कवर आज के खर्चों के हिसाब से पर्याप्त है? आज अस्पताल का एक बड़ा इलाज आसानी से लाखों में पहुंच सकता है। ऐसे में अगर आपकी पॉलिसी का कवर कम है, तो बाकी खर्च आपको अपनी जेब से देना पड़ेगा। इसलिए 55 साल से ऊपर के लोगों के लिए यह सही समय है कि वे अपनी पॉलिसी को फिर से देखें जरूरत पड़े तो अपग्रेड करें या बेहतर प्लान में पोर्ट करें। नए नियमों के साथ अब आपको बेहतर कवर, ज्यादा सुविधाएं और मजबूत क्लेम सपोर्ट मिल सकता है।

उम्र नहीं बनेगी रुकावट
कई लोग सिर्फ इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस नहीं ले पाते थे, क्योंकि उनकी उम्र 60 साल से ज्यादा हो चुकी थी।

अब ऐसा नहीं है…
नए नियमों के तहत किसी भी उम्र में हेल्थ इंश्योरेंस लिया जा सकता है। सोचिए! अगर आपके माता-पिता या परिवार के बुजुर्ग अब तक कवर से बाहर थे, तो अब उनके लिए भी एक मौका है कि वे खुद को मेडिकल खर्चों से सुरक्षित कर सकें।

शुरुआत करना ही सबसे बड़ा कदम
हम अक्सर हेल्थ इंश्योरेंस को टालते रहते हैं। ‘अभी जरूरत नहीं है’, ‘बाद में देखेंगे’। लेकिन सच्चाई यह है कि सही समय पर लिया गया फैसला ही मुश्किल समय में काम आता है। IRDAI नियमों ने हेल्थ इंश्योरेंस को ज्यादा आसान और भरोसेमंद बना दिया है। चाहे आप पहली बार पॉलिसी ले रहे हों या अपनी पुरानी पॉलिसी को बेहतर बनाना चाहते हों, यह सही समय है एक छोटा लेकिन जरूरी कदम उठाने का, ताकि मुश्किल समय में आपको सिर्फ इलाज की चिंता हो, खर्च की नहीं। -सिद्धार्थ सिंघल
हेड- हेल्थ इंश्योरेंस, पॉलिसी बाजार

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पुरानी पॉलिसी को पोर्ट कराने पर नहीं होगा नुकसान

 

  • अगर आपने पुरानी कंपनी में 3 साल गुजार लिए हैं, तो नई कंपनी पुरानी बीमारियों के लिए फिर इंतजार करने को नहीं कह सकती। आपका ‘इंतजार का समय’ पुरानी पॉलिसी से नई में सीधे जुड़ जाता है।
  • मौजूदा पॉलिसी खत्म होने से कम से कम 45 से 60 दिन पहले नई कंपनी को आवेदन दें। ऐन वक्त पर भाग-दौड़ करने से आवेदन रद्द हो सकता है।
  • अगर आपने पुरानी पॉलिसी में कोई दावा नहीं किया है और आपको अतिरिक्त ‘बोनस’ सुरक्षा राशि मिली है, तो नई कंपनी आपकी कुल सुरक्षा राशि के बराबर का नया कवर देने के लिए बाध्य है।

पोर्ट कराने का तरीका

  • नई कंपनी को फॉर्म भर बताएं कि आप पुरानी पॉलिसी ‘पोर्ट’ कराना चाहते हैं।
  • पुरानी पॉलिसी की रसीदें, पिछले साल का प्रमाण पत्र और अगर कोई बीमारी रही है, तो उसके कागजात साथ रखें।
  • मेडिकल टेस्ट फिर हो सकता है, खासकर अगर आपकी उम्र 50-55 से ज्यादा है।
  • कंपनी को 15 दिनों के भीतर अपना फैसला सुनाना होता है। अगर वे देरी करते हैं, तो उन्हें आपकी पुरानी पॉलिसी को आगे बढ़ाना पड़ सकता है।

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