अध्ययन के तहत होंगे ये प्रमुख कार्य
अध्ययन के दौरान ब्यास नदी बेसिन से जुड़े पुराने शोध, तकनीकी रिपोर्टों और पर्यावरणीय अध्ययनों की समीक्षा की जाएगी। वर्तमान नीतियों, नियमों और पर्यावरणीय मानकों का विश्लेषण कर देखा जाएगा कि वे वर्तमान परिस्थितियों में कितने प्रभावी हैं। मौजूदा जलविद्युत परियोजनाओं के संयुक्त प्रभावों का मूल्यांकन किया जाएगा। अध्ययन में भविष्य के विभिन्न विकास परिदृश्यों का भी विश्लेषण होगा और यह देखा जाएगा कि यदि नई परियोजनाएं स्थापित होती हैं या वर्तमान क्षमता में विस्तार किया जाता है तो उसका पर्यावरण और समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
संवेदनशील क्षेत्रों की होगी पहचान
अध्ययन का उद्देश्य उन क्षेत्रों की पहचान करना भी है जो पर्यावरणीय या सामाजिक दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील हैं। इनमें दुर्लभ जैव विविधता वाले क्षेत्र, महत्वपूर्ण मत्स्य आवास, भूस्खलन संभावित क्षेत्र और स्थानीय समुदायों की आजीविका से जुड़े संवेदनशील इलाकों को चिह्नित किया जाएगा। इन क्षेत्रों के लिए विशेष संरक्षण रणनीतियां और विकास संबंधी दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे, ताकि भविष्य की परियोजनाएं पर्यावरणीय नुकसान को न्यूनतम रखते हुए आगे बढ़ सकें।








