हल्द्वानी/रानीबाग-  गार्गी नदी के तट पर कत्यूरियों की आस्था में जियारानी की गूंज, कुलदेवी की वीरगाथा के गान के साथ लगी जागर

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कुमाऊं और गढ़वाल के विभिन्न हिस्सों से रानीबाग स्थित चित्रशिला धाम पहुंचे कत्यूरी वंशजों ने मंगलवार शाम अपनी आराध्या और कुलदेवी जियारानी की गुफा के दर्शन किए। इसके बाद उनकी याद में रात भर पूजा कर जागर लगाई। कत्यूरियों ने मसकबीन, ढोल, दमाऊं, नगाड़ा और थाली की धुन के साथ जियारानी की वीरगाथा का गान किया।

रानीबाग में कुमाऊं और गढ़वाल के विभिन्न हिस्सों से कत्यूरी वंशज हर साल जागर के लिए पहुंचते हैं। इस बार भी रानीखेत, कोटाबाग, सल्ट, चौखुटिया, रामनगर और गढ़वाल मंडल से कत्यूरी वंशज जय जियारानी के उद्घोष के साथ दोपहर से ही दलों में पहुंचने शुरू हो गए थे। गार्गी नदी में स्नान के बाद उन्होंने जियारानी का ध्यान लगाया। शिक्षक दीपक नौगाई बताते हैं कि चंदवंश से पहले कत्यूर वंश का शासन था। कुमाऊं में सूर्यवंशी कत्यूरियों का आगमन सातवीं सदी में अयोध्या से हुआ था।

इतिहासकार इन्हें अयोध्या के सूर्यवंश राजवंश शालिवान का संबंधी मानते हैं जबकि कुछ लोग कुलिंद या खस मूल का मानते हैं।


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