स्कूल बस किराए- सरकारी फैसले से अभिभावकों पर बढ़ा आर्थिक बोझ, निर्णय वापस लेने की मांग

एडमिशन फीस, स्कूल ड्रेस और स्टेशनरी की महंगाई से पहले से ही दबे अभिभावकों पर अब सरकारी फैसले ने नया बोझ लाद दिया है। राज्य परिवहन प्राधिकरण के ताजा आदेश ने स्कूल ट्रांसपोर्टेशन को ऐसा जरिया बना दिया है जिसे अभिभावक खुले तौर पर निजी स्कूलों की तिजोरी भरने वाली सरकारी छूट बता रहे हैं। पहले अभिभावक 1200 से 1500 रुपये तक स्कूल बस का किराया देते थे। नए आदेश के बाद यह शुल्क सीधे 2200 से 3700 रुपये तक पहुंच गया है। ऐसे में हर महीने जेब पर 1000 से 1500 रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। हल्द्वानी में 250 से ज्यादा निजी स्कूल हैं जिनमें पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं।

 

यह निर्णय परिवहन प्राधिकरण का है और शासन स्तर पर ही लिया गया है। इसमें जिला स्तर पर कुछ अलग से करना उचित नहीं है। यदि इसे लेकर कोई शिकायत या सुझाव आता है तो इस पर विचार करते हुए शासन को पत्र भेजा जाएगा।-ललित मोहन रयाल, डीएम

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