गूगल क्रोम: गूगल ने 23 साल बाद फिक्स किया बग, दूसरे लोग देख सकते थे आपकी हिस्ट्री

 

 

गूगल क्रोममें एक ऐसा बग है जिसका फायदा उठाकर दूसरी कंपनियां या साइट आपकी वेब हिस्ट्री देख सकती हैं। अब गूगल ने इसके लिए अपडेट जारी करने का एलान किया है। क्रोम में बहुत जल्द एक ऐसा पैच आने वाला है, जो एक बेहद पुराने प्राइवेसी बग को फिक्स करेगा। यह बग करीब 23 साल से ब्राउजर में मौजूद था और इसकी वजह से कोई भी वेबसाइट यह पता लगा सकती थी कि यूजर ने पहले कौन-कौन सी वेबसाइट्स विजिट की हैं।

वर्षों से कुछ वेब ब्राउजर्स ने इस समस्या से बचने के लिए कुछ उपाय जरूर अपनाए थे, लेकिन गूगल का कहना है कि इस बार जो नया फिक्स आया है, वह पूरी तरह से इस सिक्योरिटी खामी का समाधान करता है। यह फिक्स गूगल क्रोम के वर्जन 136 में शामिल होगा, जो इस महीने के अंत तक यानी 23 अप्रैल के आसपास सभी यूजर्स के लिए स्टेबल चैनल पर रोलआउट कर दिया जाएगा।

कैसे काम करता है visited लिंक पार्टिशनिंग

गूगल ने इस महीने की शुरुआत में अपने क्रोम डेवेलपर ब्लॉग पर बताया कि उन्होंने CSS के visited सेलेक्टर में मौजूद उस समस्या को ठीक कर दिया है, जिससे वेबसाइट्स यूजर की ब्राउजिंग हिस्ट्री से जुड़ी जानकारी चुरा सकती थीं।

जब कोई यूजर किसी लिंक पर क्लिक करता है, तो ब्राउजर उस लिंक का रंग बदलकर यह दिखाता है कि वह लिंक विजिट किया गया है। आमतौर पर विजिटेड लिंक का रंग नीले से बदलकर पर्पल हो जाता है, लेकिन यह पर्पल रंग केवल उसी वेबसाइट पर नहीं, बल्कि किसी भी वेबसाइट पर वही लिंक होने पर भी दिखाई देता था।

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इस कमजोरी का फायदा उठाकर स्कैमर्स वेबसाइट्स कोड के जरिए यूजर की ब्राउजिंग हिस्ट्री का पता लगा सकती थीं। यह समस्या सबसे पहले मई 2022 में पहचानी गई थी, लेकिन यही करीब 23 साल पुरानी हैं।

गूगल का समाधान- थ्री-टियर पार्टिशनिंग सिस्टम

इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए गूगल ने तीन स्तरों पर काम किया। गूगल का नया सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि यदि यूजर ने किसी साइट A पर साइट B का लिंक क्लिक किया है, तो वह लिंक साइट C पर विजिटेड (पर्पल) के रूप में नहीं दिखेगा।

यानी अब किसी वेबसाइट के लिए यह जानना असंभव हो जाएगा कि यूजर ने वह लिंक पहले कभी विजिट किया है या नहीं। इसके अलावा गूगल क्रोम फ्रेम्स के अंदर मौजूद :visited लिंक हिस्ट्री की जांच करने की क्षमता भी सीमित कर देगा।

गूगल का कहना है कि यह बग क्रोम वर्जन 136 में पूरी तरह से फिक्स हो चुका है। फिलहाल बीटा टेस्टर्स और जो यूजर नाइटली बिल्ड्स (डेली अपडेट्स) का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे पहले से ही इस 23 साल पुराने बग से सुरक्षित हैं।
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