हल्द्वानी: विधानसभा चुनाव के लिए फील्डिंग तैयार, नेताओं के टकराव नौकरशाहों पर पड़ा भारी,पढ़ें..

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राज्य सरकार ने 16 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अभी से ही फील्डिंग सजाना शुरु कर दी है। रविवार को कुमाऊं में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। मंडल के छह जिलों में से चार के डीएम बदल दिए गए हैं। इनमें तीन को कोई जिला न देकर सचिवालय भेज दिया गया है।

केवल बागेश्वर के डीएम आशीष भटगांई को ही दोबारा जिला मिला है। कई एडीएम और एसडीएम को भी इधर से उधर किया गया है। इन तबादलों के कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। अफसरों से सत्ता पक्ष के नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी, विपक्ष के लगातार सवाल उठाने को इसकी वजह माना जा रहा है। कुमाऊं में कुछ जगहों पर ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के दौरान भी कई घटनाएं सामने आईं जिससे सरकार की काफी किरकिरी हुई।
विनोद गिरि गोस्वामी का महज 13 महीने में ही तबादला: पिथौरागढ़ के डीएम विनोद गिरि गोस्वामी का महज 13 महीने में ही तबादला कर दिया गया। उन्होंने सात सितंबर 2024 को कार्यभार ग्रहण किया था। उन्हें अपर सचिव शहरी विकास बनाया गया है। उनके स्थान पर बागेश्वर के डीएम आशीष भटगांई को पिथौरागढ़ का डीएम बनाया है। बताया जा रहा है कि सत्ताधारी पार्टी का एक पक्ष डीएम से नाराज था। बीते दिनों उन्होंने एक बड़े सरकारी कार्यक्रम का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया था। जिले में राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता को स्थगित करने के पीछे की एक वजह भी यही होने की चर्चा है। डीडीहाट विधायक बिशन सिंह चुफाल ने भी जिला प्रशासन के कार्यों पर कई बार सवाल उठाए थे। कांग्रेस के धारचूला विधायक हरीश धामी ने तो विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर डीएम पर उनका फोन न उठाने का आरोप लगाते हुए विशेषाधिकार हनन की बात कही थी।

आलोक पीएमजीएसवाई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी 
अल्मोड़ा के डीएम आलोक कुमार पांडे को पीएमजीएसवाई का मुख्य कार्यकारी अधिकारी व अपर सचिव सूचना का जिम्मा सौंपा गया है। उन्हें 13 महीने ही जिले की सेवा का मौका मिला। यहां पंचायत चुनाव के दौरान भिकियासैंण और द्वाराहाट में ब्लॉक प्रमुख पद के मतदान के दिन हंगामा, मारपीट हुई। बीडीसी सदस्यों के गायब होने के मामले में कांग्रेसियों ने कई घंटे जाम लगा दिया था। हालांकि गायब सदस्य बाद में खुद ही वापस आ गए थे। कुमाऊं की लाइफ लाइन हल्द्वानी-अल्मोड़ा हाईवे पर क्वारब में भूस्खलन की समस्या का समाधान नहीं हो सका। पूर्व सीएम हरीश रावत समेत विपक्ष के कई नेताओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

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