फरसा वाले बाबा: 11 साल की उम्र में छोड़ दिया घर, ऐसे चंद्रशेखर से बने फरसा वाले बाबा…

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यूपी के मथुरा में हादसे में जान गंवाने वाले फरसा वाले बाबा के नाम से विख्यात चंद्रशेखर महाराज का जीवन त्याग और तपस्या की एक अनूठी मिसाल रहा। मूल रूप से सिरसागंज के ग्राम नगला भूपल के रहने वाले बाबा ने मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में ही घर का त्याग कर दिया था। उनके निधन की खबर मिलते ही पैतृक गांव और उनके परिजन में शोक की लहर दौड़ गई है।

 

11 साल की आयु में घर छोड़ चले गए अयोध्या
वर्तमान में नगला भूपल में बाबा के खानदानी भाई धर्मवीर सिंह यादव का परिवार रहता है। इधर, हाथवंत ब्लॉक में बाबा के सगे बड़े भाई केशव सिंह अपने परिवार के साथ रहते हैं। केशव सिंह की कस्बा में ही सराफ की दुकान है। केशव सिंह के अनुसार उन्हें शनिवार सुबह पांच बजे करीब बाबा के साथ घटना होने की जानकारी उनके शिष्य हरिओम ने फोन पर दी थी। सूचना पाते ही परिवार के साथ मथुरा के लिए रवाना हो गए। केशव सिंह के अनुसार 11 साल की आयु में घर छोड़ने के बाद चंद्रशेखर महाराज अयोध्या चले गए थे। वहां उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और बाद में अपनी एक अलग पहचान बनाई। फरसा धारण करने के कारण वह फरसा वाले बाबा के नाम से मशहूर हो गए।

 

गोसेवा के लिए समर्पित कर दिया जीवन
केशव सिंह ने बताया कि चंद्रशेखर महाराज बचपन से ही विरक्त स्वभाव के थे। करीब 40 साल पहले उनके मथुरा में होने की सूचना मिली थी। परिवार के लोग उन्हें घर वापस लाने गए और बहुत मिन्नतें कीं, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बाबा का कहना था कि अब उनका जीवन केवल गोमाता की सेवा के लिए समर्पित है। इसी संकल्प के कारण उन्होंने विवाह नहीं किया और सांसारिक बंधनों से दूर रहे। केशव सिंह ने रुंधे गले से बताया कि शनिवार सुबह जब इस अनहोनी की जानकारी हुई तो पूरा परिवार शोक में डूब गया। बाबा परिवार के कार्यक्रमों में शामिल नहीं होते थे, लेकिन गांव में किसी भी धार्मिक आयोजन की सूचना मिलने पर वह जरूर आते थे।

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चार घंटे तक हाईवे पर चला पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच शह-मात का खेल
आगरा-दिल्ली हाईवे (एनएच-19) पर करीब चार घंटे तक प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच शह-मात का खेल चलता रहा। पुलिस किसी तरह से बाबा के शव को हटाने के प्रयास में लगी थी, जबकि प्रदर्शनकारी किसी भी कीमत पर बाबा के शव को नहीं ले जाने देना चाहते थे। इसी जद्दोजहद ने संघर्ष करवाया। पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों ने पथराव करके कई बार खदेड़ा, लेकिन पुलिसकर्मी भी कभी टीयर गैस छोड़कर तो कभी डंडे फटकार कर आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे।

 

पथराव में महिलाएं भी शामिल रहीं
सुबह करीब 7 बजे प्रदर्शनकारी बाबा के शव को लेकर हाईवे पर पहुंचे और जाम लगा दिया। यहां प्रदर्शनकारियों की मागों को स्वीकार करते हुए अधिकारियों ने गोसेवकों को शस्त्र लाइसेंस दिलाने का आश्वासन दिया। इससे कुछ लोग तो मान गए पर अन्य कुछ लोगों ने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि सेटिंग कर ली। बस फिर क्या था। हंगामा खड़ा हो गया। देखते ही देखते प्रदर्शनकारी आगबबूला हो उठे और हाईवे पर हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो मामला और बिगड़ गया। अचानक पथराव शुरू हो गया और सबसे पहले अधिकारी व पुलिसकर्मियों के वाहनों पर पत्थर बरसाए गए। हैरत की बात रही कि पथराव में कुछ महिलाएं भी शामिल रहीं। प्रदर्शनकारियों ने पत्थर बरसाकर पुलिसकर्मियों को दूर तक दौड़ाया। इसमें 27 से अधिक पुलिसकर्मी व अन्य लोग चोटिल हो गए।

 

आनन-फानन भेजा अस्पताल
कई पुलिसकर्मियों को चोट लगने के कारण आनन-फानन अस्पताल भेजा गया। साथ ही मौके की ओर एंबुलेंस, फायर बिग्रेड आदि गाड़ियां रवाना की गईं। इधर-उधर के थाना क्षेत्रों से भी पुलिस बल बुलाया गया, लेकिन इस दौरान स्थिति बिगड़ चुकी थी। दर्जनों से ज्यादा वाहन तोड़े जा चुके थे और कई लोगों को बुरी तरह चोट लग गई थी।

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24 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, पूछताछ
नेशनल हाईवे-19 पर गो सेवक बाबा चंद्रशेखर दास महाराज के शव को रखकर किए गए हंगामे और पथराव के मामले में पुलिस ने कड़ा रुख अपना लिया है। मौके पर की गई घेराबंदी के आधार पर पत्थरबाजी में शामिल कई लोगों को चिह्नित कर हिरासत में ले लिया है।


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