अयोध्या- श्रीमद्भागवत कथा में सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन, सच्ची मित्रता और भक्ति का दिया संदेश।

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गोसाईगंज विधायक अभय सिंह के आवास राजेपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण महायज्ञ के अंतिम दिन कथा व्यास पंडित ज्ञान चंद्र द्विवेदी ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की पावन मित्रता का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सच्ची मित्रता न तो धन-दौलत देखती है और न ही परिस्थितियां, बल्कि वह सुख-दुख में साथ निभाने की भावना से परिपूर्ण होती है।
कथा व्यास ने सुदामा को भगवान के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण का प्रतीक बताते हुए कहा कि ईश्वर भाव के भूखे होते हैं और वे हर भक्त के मन की भावना को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने बताया कि सुदामा अत्यंत विद्वान होने के बावजूद अपने ज्ञान का उपयोग धनार्जन के लिए नहीं, बल्कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए करते थे।
कथा के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण की कथाओं का श्रवण व्यक्ति को आत्मज्ञान की ओर अग्रसर करता है। महाराज परीक्षित और शुकदेव जी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवद् कथा का श्रवण पापों का नाश कर मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति कराता है। कथा व्यास ने सुदामा प्रसंग के माध्यम से निष्काम भक्ति, सरलता और सच्चे समर्पण का संदेश देते हुए कहा कि भगवान केवल निष्कपट भाव से ही प्रसन्न होते हैं।
कथा 14 मार्च को प्रारम्भ हुई थी श्रीमद्भागवत महापुराण महायज्ञ का समापन 21 मार्च को भण्डारे के साथ होगा। आशा भगवान बक्श सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भण्डारे का आयोजन किया गया है।
मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, पूर्व मंत्री महेन्द्र सिंह, मोती सिंह, शिक्षक एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह, एमएलसी हरिओम पाण्डेय, पूर्व महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, गिरीश पाण्डेय डिप्पुल, आकश मणि त्रिपाठी, सूर्यवंश क्षत्रिय समाज के संरक्षक गुरूप्रसाद, बिपिन सिंह, जंग बहादुर सिह सहित ने बडी संख्या में लोगों कथा का रसपान किया।

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