उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के आह्वान पर चल रही इंजीनियरों की हड़ताल से विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। कुमाऊं में करीब 3808 करोड़ के बड़े प्रोजेक्ट जमरानी बांध परियोजना जैसे कार्याें में इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
लोनिवि के साथ ही सिंचाई, लघु सिंचाई, उरेडा, आरडब्ल्यूडी, जिला पंचायत, मंडी, नलकूप आदि विभागों से जुड़े इंजीनियर बीते तीन दिन से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। ये सभी पूर्व की भांति पदोन्नति वेतनमान देने, 10 साल की सेवा पर प्रथम एसीपी के रूप में 5400 ग्रेड पे देने, पुरानी पेंशन लागू करने जैसी 27 सूत्री मांगों के लिए आंदोलित हैं।
बुधवार को तिकोनिया स्थित लोनिवि गेस्ट हाउस परिसर में आयोजित धरने में एनसी उपाध्याय और शंकर शंभू पंत ने कहा कि कुमाऊं भर के 900 से अधिक इंजीनियर हड़ताल में शामिल हैं। शासन स्तर पर हुई समझौता वार्ता भी बेनतीजा रही। उन्होंने बताया कि 15 दिन का समय मांगा गया है। वहां महासंघ के जनपदीय सचिव गणेश रौतेला, सुभाष जोशी, सुरेश जोशी, भास्कर कांडपाल, संजय तिवारी, प्रमोद सुयाल, चारु जोशी, अमित मुनगली आदि थे।
साइटों पर सुपरवाइजर देख रहे काम
जेई-एई के हड़ताल पर जाने से विकास कार्याें पर असर पड़ रहा है। कार्य की गुणवत्ता जांचने के साथ ही भुगतान संबंधी प्रक्रिया बाधित हो सकती है। हालांकि अभी साइटों पर सुपरवाइजर काम देख रहे हैं। हड़ताल से लोनिवि का चकलुवा में तीन करोड़ के पुल का निर्माण रुकने के साथ ही सड़कों का काम रुक गया है। एक अधिकारी ने बताया कि हड़ताल लंबी खींची तो विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।







