Elections: आज12 वार्ड समितियों के चुनाव, चार पर टिकीं नजरें, bjp सतर्क… कांग्रेस बनेगी किंगमेकर

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मसीडी की 12 वार्ड समितियों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए आज मतदान होगा। इस चुनाव में अधिकांश समितियों में तस्वीर लगभग साफ है, लेकिन रोहिणी, शहरी-सदर पहाड़गंज, पश्चिमी और दक्षिणी वार्ड समिति के चुनाव बेहद दिलचस्प हैं। इन चार समितियों के नतीजे भाजपा और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच राजनीतिक ताकत का नया संकेत देंगे।

चुनाव से पहले ही दो वार्ड समितियों में परिणाम लगभग तय हो गए हैं। करोल बाग वार्ड समिति में भाजपा ने उम्मीदवार नहीं उतारे, क्योंकि वहां उसके पास बहुमत से काफी कम पार्षद हैं। ऐसे में यहां आप के उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए जाएंगे। वहीं केशवपुरम वार्ड समिति में आप ने उम्मीदवार नहीं उतारे, जिससे भाजपा उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय है। सबसे दिलचस्प मुकाबला रोहिणी और दक्षिणी वार्ड समिति में माना जा रहा है। इन दोनों समितियों में किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। ऐसे में कांग्रेस पार्षदों का समर्थन जीत-हार तय कर सकता है।
पश्चिमी वार्ड समिति में आम आदमी पार्टी के पास बहुमत है, लेकिन भाजपा उससे केवल एक पार्षद पीछे है। ऐसे में यदि क्रॉस वोटिंग होती है तो आप की बढ़त खत्म हो सकती है और मुकाबला भाजपा के पक्ष में जा सकता है। इसलिए इस समिति पर भी सभी की नजरें टिकी हैं। शहरी-सदर पहाड़गंज वार्ड समिति में आम आदमी पार्टी के सात, भाजपा के चार और अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक का एक पार्षद हैं। भाजपा को उम्मीद है कि फॉरवर्ड ब्लॉक के पार्षद का समर्थन मिलने के साथ यदि आप में क्रॉस वोटिंग होती है तो मुकाबला उसके पक्ष में जा सकता है।

नरेला, सिविल लाइंस, नजफगढ़, मध्य, शाहदरा दक्षिणी और शाहदरा उत्तरी वार्ड समितियों में भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। इन समितियों में भाजपा के पास आम आदमी पार्टी की तुलना में पर्याप्त संख्या बल है और उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।

वार्ड समिति चुनाव से पहले भाजपा सतर्क, पार्षदों को क्रॉस वोटिंग पर कार्रवाई की चेतावनी
एमसीडी की 12 वार्ड समितियों के चुनाव से पहले प्रदेश भाजपा ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए रणनीति बनाई है। पार्टी ने मंगलवार को होने वाले चुनाव से पहले सभी भाजपा पार्षदों को प्रदेश कार्यालय तलब कर स्पष्ट निर्देश दिए कि वे पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के पक्ष में ही मतदान करें।

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बैठक में नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि कोई पार्षद पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ मतदान करता है या पार्टी लाइन से हटकर कार्य करता है तो उसके खिलाफ कड़ी संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, भाजपा का विशेष फोकस उन वार्ड समितियों पर है, जहां मुकाबला कांटे का माना जा रहा है। इनमें रोहिणी, दक्षिणी, पश्चिमी और शहरी-सदर पहाड़गंज वार्ड समितियां शामिल हैं।

वार्ड समिति के चुनाव में कांग्रेस बनेगी किंगमेकर, नहीं खोले पत्ते
एमसीडी की 12 वार्ड समितियों के चुनाव में इस बार कांग्रेस किंगमेकर बनेगी। इस चुनाव में रोहिणी और दक्षिणी वार्ड समिति की चर्चा सबसे ज्यादा है। दोनों समितियों में किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नही है। लिहाजा कांग्रेस के दो-दो पार्षद जीत-हार का फैसला करेंगे। हालांकि उसने अब तक इस राज से पर्दा नहीं उठाया है कि वह भाजपा या आप में किसे समर्थन देगी।

सूत्रों के अनुसार, प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने दोनों वार्ड समितियों के अपने पार्षदों को किसी दल के पक्ष में खुला निर्देश देने के बजाय अपने स्तर पर फैसला लेने की सलाह दी है। उसने पार्षदों को मतदान से पहले यह आकलन करने के लिए कहा है कि किस उम्मीदवार का समर्थन करने से उनके क्षेत्र में विकास कार्यों को अधिक गति मिल सकती है। साथ ही उन्हें यह भी याद दिलाया कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की लड़ाई भाजपा से है, जबकि दिल्ली की राजनीति में उसका सीधा मुकाबला आम आदमी पार्टी से भी है।

प्रदेश कांग्रेस ने अपने पार्षदों को यह भी निर्देश दिया है कि वे बिखराव से बचें और एकजुट होकर एक ही उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करें, ताकि पार्टी का रुख स्पष्ट और प्रभावी रहे। रोहिणी वार्ड समिति में 23 पार्षद हैं। इनमें आप के 11, भाजपा के 10 और कांग्रेस के दो पार्षद हैं। इसी तरह कांग्रेस के दोनों वोट निर्णायक भूमिका निभाएंगे। वहीं दक्षिणी वार्ड समिति में कुल 22 पार्षद हैं, जिनमें भाजपा और आप के 10-10 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के दो पार्षद हैं। इस समिति का एक वार्ड फिलहाल रिक्त है। ऐसे में यहां भी कांग्रेस का समर्थन चुनाव का परिणाम तय करेगा। गौरतलब है कि बीते साल कांग्रेस ने वार्ड समिति चुनाव का बहिष्कार किया था और मतदान में हिस्सा नहीं लिया था। लेकिन इस बार पार्टी ने चुनाव में भाग लेने का फैसला किया है।

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