एमसीडी की 12 वार्ड समितियों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए आज मतदान होगा। इस चुनाव में अधिकांश समितियों में तस्वीर लगभग साफ है, लेकिन रोहिणी, शहरी-सदर पहाड़गंज, पश्चिमी और दक्षिणी वार्ड समिति के चुनाव बेहद दिलचस्प हैं। इन चार समितियों के नतीजे भाजपा और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच राजनीतिक ताकत का नया संकेत देंगे।
नरेला, सिविल लाइंस, नजफगढ़, मध्य, शाहदरा दक्षिणी और शाहदरा उत्तरी वार्ड समितियों में भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। इन समितियों में भाजपा के पास आम आदमी पार्टी की तुलना में पर्याप्त संख्या बल है और उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।
वार्ड समिति चुनाव से पहले भाजपा सतर्क, पार्षदों को क्रॉस वोटिंग पर कार्रवाई की चेतावनी
एमसीडी की 12 वार्ड समितियों के चुनाव से पहले प्रदेश भाजपा ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए रणनीति बनाई है। पार्टी ने मंगलवार को होने वाले चुनाव से पहले सभी भाजपा पार्षदों को प्रदेश कार्यालय तलब कर स्पष्ट निर्देश दिए कि वे पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के पक्ष में ही मतदान करें।
बैठक में नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि कोई पार्षद पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ मतदान करता है या पार्टी लाइन से हटकर कार्य करता है तो उसके खिलाफ कड़ी संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, भाजपा का विशेष फोकस उन वार्ड समितियों पर है, जहां मुकाबला कांटे का माना जा रहा है। इनमें रोहिणी, दक्षिणी, पश्चिमी और शहरी-सदर पहाड़गंज वार्ड समितियां शामिल हैं।
वार्ड समिति के चुनाव में कांग्रेस बनेगी किंगमेकर, नहीं खोले पत्ते
एमसीडी की 12 वार्ड समितियों के चुनाव में इस बार कांग्रेस किंगमेकर बनेगी। इस चुनाव में रोहिणी और दक्षिणी वार्ड समिति की चर्चा सबसे ज्यादा है। दोनों समितियों में किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नही है। लिहाजा कांग्रेस के दो-दो पार्षद जीत-हार का फैसला करेंगे। हालांकि उसने अब तक इस राज से पर्दा नहीं उठाया है कि वह भाजपा या आप में किसे समर्थन देगी।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने दोनों वार्ड समितियों के अपने पार्षदों को किसी दल के पक्ष में खुला निर्देश देने के बजाय अपने स्तर पर फैसला लेने की सलाह दी है। उसने पार्षदों को मतदान से पहले यह आकलन करने के लिए कहा है कि किस उम्मीदवार का समर्थन करने से उनके क्षेत्र में विकास कार्यों को अधिक गति मिल सकती है। साथ ही उन्हें यह भी याद दिलाया कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की लड़ाई भाजपा से है, जबकि दिल्ली की राजनीति में उसका सीधा मुकाबला आम आदमी पार्टी से भी है।







