दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा से खिलवाड़: ढाबों ने काटी लोहे की रेलिंग, खतरा…

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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे ने 14 अप्रैल, 2026 को उद्घाटन के बाद से दोनों शहरों के बीच की यात्रा को बेहद सुगम बना दिया है। जहां पहले इस सफर में 6 घंटे से अधिक का समय लगता था, वहीं अब यह दूरी महज 2.5 घंटे में पूरी हो रही है। लेकिन, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने इस हाई-स्पीड मार्ग पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के साथ क्या समझौता किया जा रहा है?

सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में एक्सप्रेसवे के किनारे लगी लोहे की ‘गार्ड रेल्स’ में खतरनाक दरारें या गैप दिखाई दे रहे हैं:

  • ढाबों की मनमानी: आरोप है कि एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित ढाबा संचालकों ने ग्राहकों की सीधी एंट्री और एग्जिट के लिए इन गार्ड रेल्स को अवैध रूप से काट दिया है।
  • खतरनाक गैप: वीडियो में महज कुछ सौ मीटर की दूरी के भीतर ऐसे दो अवैध कट दिखाई दे रहे हैं।
  • बैरियर का अभाव: गार्ड रेल्स का मुख्य काम वाहनों को सड़क से नीचे उतरने या पलटने से रोकना है। जिसे काटकर अब पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

ये अवैध कट यात्रियों के लिए जानलेवा क्यों साबित हो सकते हैं?

तेज रफ्तार वाले इस एक्सप्रेसवे पर अचानक किसी वाहन का सामने आना बड़े हादसे को न्योता देता है:

  • प्रतिक्रिया का समय: एक्सप्रेसवे पर वाहन 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलते हैं। ऐसे में अचानक किसी ढाबे से निकलने वाले वाहन को देखकर ड्राइवर को संभलने का मौका नहीं मिलता।
  • अचानक ब्रेक और टक्कर: ढाबे के ग्राहकों या डिलीवरी वाहनों की वजह से तेज रफ्तार गाड़ियों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है या मुड़ना पड़ता है। जिससे पीछे से टक्कर या नियंत्रण खोने का खतरा बढ़ जाता है।
  • विजिबिलिटी की समस्या: रात के समय या पीक ऑवर्स के दौरान ये अवैध कट और भी घातक हो जाते हैं। क्योंकि कम दृश्यता में अचानक घुसपैठ करने वाले वाहन ‘चेन-रिएक्शन’ हादसों का कारण बन सकते हैं।
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के बारे में अहम बातें?

यह एक्सप्रेसवे उत्तर भारत की एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजना है:

  • निर्माण लागत: इस एक्सप्रेसवे को लगभग 12,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार किया गया है।
  • मार्ग और दूरी: यह 213 किलोमीटर लंबा मार्ग दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर से शुरू होकर देहरादून तक जाता है।
  • प्रमुख शहर: यह उत्तर प्रदेश के बागपत, बड़ौत, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर जैसे शहरों से होकर गुजरता है।
  • रफ्तार सीमा: इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों के लिए अधिकतम रफ्तार सीमा 120 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है।

एक्सप्रेसवे का निर्माण समय बचाने और सफर को सुरक्षित बनाने के लिए किया गया है। लेकिन निजी फायदे के लिए सुरक्षा उपकरणों (गार्ड रेल्स) के साथ की जा रही यह छेड़छाड़ किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यात्रियों ने अधिकारियों से इस पर तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है।

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