देहरादून: सुलह की राह पर कर्णप्रयाग विवाद, शांति-संवाद से समाधान पर सहमति, निहंगों की चार मांगें क्या?

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र्णप्रयाग प्रकरण के बाद उत्तराखंड में तनावपूर्ण माहौल के बीच शुक्रवार को उत्तराखंड प्रशासन और निहंग सिख समुदाय के प्रतिनिधियों के बीच सौहार्दपूर्ण एवं सकारात्मक माहौल में महत्वपूर्ण वार्ता हुई। बैठक में दोनों पक्षों ने शांति बनाए रखने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने पर सहमति जताई। निहंगों ने प्रशासन के सामने मुकदमा वापस लेने, निहंग सिखों से मिलने समेत चार मांगें रखीं।

इन पर प्रशासन ने दो दिन का समय मांगते हुए उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इसके बाद स्थिति सामान्य हो गई है। निहंग दो दिनों तक पांवटा साहिब में ही रहेंगे। निहंग प्रतिनिधियों ने कहा कि कर्णप्रयाग घटना में दोनों पक्षों से गलती हुई है और आपसी समझौते के जरिये मामले का समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कानून-व्यवस्था खराब नहीं करना चाहते, बल्कि भाईचारा और प्रेम का संदेश लेकर आए हैं। उन्होंने मांग रखी कि गिरफ्तार किए गए चार निहंग सिंहों की रिहाई होने तक वह वापस नहीं लौटेंगे।

निहंगों ने किसी भी परिस्थिति में कानून को हाथ में नहीं लेने का दिया आश्वासन
शुक्रवार को भी उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। इसी बीच शुक्रवार को हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर, अल्मोड़ा के एसएसपी हरबंस सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी गुरुद्वारा पांवटा साहिब पहुंचे। इस मौके पर डीएसपी पांवटा साहिब मानवेंद्र सिंह और थाना प्रभारी कुलवंत सिंह भी मौजूद रहे। अधिकारियों और निहंग प्रतिनिधियों के बीच विस्तृत एवं सकारात्मक चर्चा हुई, जिसके बाद उत्तराखंड के अधिकारी लौट गए, जबकि पंजाब से आया निहंगों का जत्था गुरुद्वारा पांवटा साहिब में ही रुका हुआ है। बैठक के बाद हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि निहंग सिंहों के साथ शांति वार्ता सफलतापूर्वक संपन्न हुई है। निहंग सिंहों ने भी शांति बनाए रखने और किसी भी परिस्थिति में कानून को हाथ में नहीं लेने का आश्वासन दिया है। वार्ता सफल रहने के बाद फिलहाल माहौल शांतिपूर्ण बना हुआ है।

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उत्तराखंड प्रशासन के साथ सकारात्मक चर्चा हुई है और प्रशासन ने उनकी सभी मांगों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रशासन ने दो दिन का समय मांगा है, जिसके चलते अगले दो दिन तक उत्तराखंड जाने को लेकर कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। दो दिनों के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती और गिरफ्तार निहंग सिंहों को रिहा नहीं किया जाता, तो आगे की रणनीति पर अमल किया जाएगा। -जगदीप सिंह अकाली, निहंग प्रतिनिधि

पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने निहंगों के साथ वार्ता की जिसमें उन्होंने अपना मांगपत्र सौंपा है। इस मांगपत्र को उचित कार्रवाई के लिए शासन को प्रेषित कर दिया गया है। फिलहाल बॉर्डर पर शांति है। एहतियातन सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। – प्रमेंद्र डोबाल, एसएसपी देहरादून

 

यह हैं निहंगों की मांगें

-जेल में बंद निहंगों से मिलने दिया जाए।

-अस्पताल में भर्ती घायल निहंग से भी मुलाकात हो।

-निहंगों को जमानत दिलाएं और उन्हें साथ लेकर ही जाएंगे।-शांतिपूर्वक हेमकुंड यात्रा करने दी जाए।

 

निहंगों से वार्ता के लिए सरकार ने लगाई सिंहों की टोली
निहंगों से वार्ता के लिए सरकार ने भी अपने सिंहों की टीम उतारी थी। इनमें एसएसपी हरिद्वार नवनीत भुल्लर से लेकर कई अन्य सिख अफसर भी पांवटा साहिब में निहंगों से वार्ता करने पहुंचे। इससे वहां न तो भाषा बाधा बनी और न ही सांस्कृतिक समझ की उलझन पैदा हुई। दो दिनों में कई दौर की वार्ता के बाद आखिरकार शुक्रवार को यह रणनीति काम कर गई और निहंगों के साथ सकारात्मक बातचीत से इसका अस्थाई ही सही लेकिन हल निकल आया।

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पंजाबी कितने लोगों को आती है यह थी बड़ी समस्या
दरअसल, ज्यादातर निहंग केवल पंजाबी भाषा में ही बात करते हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और पुलिस अफसर को निहंगों से सीधा संवाद करने में भी कठिनाई हो रही थी। कई निहंग सिख इसी बात को कह रहे थे, उनसे पंजाबी में बात करो। ऐसे में पंजाबी कितने लोगों को आती है यह बड़ी समस्या थी। इस पर सरकार ने विभिन्न थानों, सर्किल और जिलों में तैनात सिख अफसरों को मोर्चा संभालने के निर्देश दिए। इनमें सबसे पहले बृहस्पतिवार को एएसपी हरबंश सिंह और इंस्पेक्टर यादवेंद्र सिंह वाजवा को पांवटा साहिब गुरुद्वारे में निहंगों के प्रतिनिधियों से वार्ता के लिए भेजा गया। कुछ देर तक बातें हुईं लेकिन रात में कुछ निहंग बैरिकेडिंग तोड़कर वैकल्पिक मार्गों से होते हुए देहरादून पहुंच गए।

 

कई घंटे निहंगों के प्रतिनिधियों से वार्ता
इसके बाद शुक्रवार को इस पूरी वार्ता की जिम्मेदारी एसएसपी हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर को दी गई। एसएसपी भुल्लर के साथ प्रदेश के अन्य सिख पुलिस अफसर भी वहां मौजूद रहे। उन्होंने कई घंटे निहंगों के प्रतिनिधियों से वार्ता की। उन्हें उनकी बोली पंजाबी में हर बात को समझाया गया। बता दें कि बोली के अलावा सांस्कृतिक और धार्मिक समझ की उलझन भी बड़ी समस्या थी। ऐसे में इन अफसरों ने निहंगों के साथ वार्ता में इन सब बातों पर सावधानी बरती। तब कहीं जाकर शुक्रवार शाम यह मामला शांत हुआ।


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