देहरादून- नहीं रहा पिता का साया, पर अफसर बन उर्मी साहू ने रचा इतिहास, गायकवाड़ भाइयों की भी अनोखी उपलब्धि

छत्तीसगढ़ की उर्मी साहू उन नौ महिला जेंटलमैन कैडेट्स में शामिल हैं जो आईएमए की ट्रेनिंग पूरी कर आज अधिकारी बनी हैं। उनके परिवार में अब तक कोई सेना में नहीं भर्ती हुआ था, लेकिन उर्मी का सपना था कि वे सेना की अधिकारी बनें। उनका यह सपना एक इतिहास रचने वाला भी साबित हुआ।

 

वे महिला कैडेट्स के सेना में जाने वाली टीम का हिस्सा बनीं। उनके एक पारिवारिक मित्र ने बताया कि उर्मी के पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। मां एक नर्स हैं। लेकिन उर्मी के सपने बड़े थे। वे सेना में जाकर देश सेवा करना चाहती थीं। उन्होंने पिता की कमी को भी इसके आड़े नहीं आने दिया और अपना सपना पूरा कर दिखाया।

 

एक साथ सेना में अधिकारी बने महाराष्ट्र दो भाई

देहरादून। आईएमए में शनिवार को महाराष्ट्र के दो सगे भाई एक साथ पासआउट हुए। एक साथ पले-बढ़े इन भाइयों के कंधों पर एक साथ सितारे लगे। दोनों भाइयों को साथ पास आउट होता देख परिवार के चेहरे पर भी अलग ही रौनक दिखी। महाराष्ट्र के प्रकाश भास्कर गायकवाड़ और प्रसाद भास्कर गायकवाड़ दोनों सगे भाई हैं। दोनों एक साथ आईएमए में दाखिल हुए थे।

 

विशाल कुमार ने जीता स्वॉर्ड ऑफ ऑनर और स्वर्ण पदक

लेफ्टिनेंट विशाल कुमार ने सैन्य अकादमी में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने स्वॉर्ड ऑफ ऑनर और नियमित पाठ्यक्रम में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। विशाल ने बचपन से ही मिलिट्री स्कूल में पढ़ाई की थी। यह उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि हमेशा खुद को बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित करना चाहिए। हमेशा जीवन का एक लक्ष्य होना चाहिए इससे ही आप सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचते हैं। लक्ष्य के बिना जीवन अधूरा है। उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित स्वॉर्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके साथ ही उन्होंने अपने नियमित पाठ्यक्रम में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए स्वर्ण पदक भी जीता। उन्होंने इसका श्रेय अपने माता-पिता को दिया।

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महिला कैडेट्स का पासआउट होना भारत के महिला नेतृत्व वाले विकास का प्रतीक : मुर्मू

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से महिला कैडेट्स का पासआउट होना रक्षा सेनाओं के लिए केवल एक उपलब्धि नहीं है। बल्कि यह भारत के महिला नेतृत्व वाले विकास को दर्शाता है। आईएमए से पहली बार नौ महिलाएं अफसर बनकर निकली हैं। तीनों सेनाओं की कमांडर राष्ट्रपति मुर्मू शनिवार को इस ऐतिहासिक पल की साक्षी बनीं। उन्होंने पासिंग आउट परेड की सलामी ली और युवा अफसरों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। आईएमए परेड में कुल 515 कैडेट्स पासआउट हुए।

इनमें 158 रेगुलर कोर्स, 47 टेक्निकल एंट्री स्कीम कोर्स, 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स और 56वें स्पेशल कमीशन ऑफिसर कोर्स से थे। इसके अलावा 34 मित्र राष्ट्रों के ऑफिसर्स कैडेट्स भी अकादमी से पासआउट हुए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने परेड की सलामी के बाद अफसरों को संबोधित किया। उन्होंने अफसरों से कहा कि उनका साहस और विवेक सबसे बड़ी शक्ति होंगे। महिला कैडेट्स को परेड में शामिल होते देख उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में और अधिक महिला कैडेट अकादमी से जुड़ेंगी।

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