एक पिता अपने बेटे के सपने के लिए कितना आगे जा सकता है इसकी मिसाल हैं दीपक भसीन। उत्तराखंड हाईकोर्ट की स्थायी नौकरी छोड़कर वह बेटे यज्ञ भसीन को अभिनेता बनाने के लिए मुंबई पहुंच गए। अनजान शहर, सीमित संसाधन और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद हार नहीं मानी। संघर्ष के बाद बेटे को एक्टर बनाया। बेटे ने कंगना रनौत की फिल्म पंगा से अपना डेब्यू किया।
हरिद्वार निवासी दीपक भसीन ने अपने बेटे यज्ञ भसीन के सपने को साकार करने के लिए बड़ा फैसला लिया। उत्तराखंड हाईकोर्ट से उन्होंने साल 2017 में अपने बेटे के अभिनेता बनने के सपने को पूरा करने के लिए सरकारी नौकरी छोड़ दी और परिवार सहित मुंबई चले गए।
पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी दीपक के पिता चाहते थे कि वह सरकारी नौकरी करें। उनकी पहली नियुक्ति एक सरकारी स्कूल में प्राथमिक शिक्षक के रूप में हुई। इसके बाद उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट की भर्ती परीक्षा दी और चयनित हो गए और 14 साल वहां काम किया।
उन्होंने बताया कि मुंबई पहुंचने के बाद उनके संघर्ष का असली दौर शुरू हुआ। वहां उनका कोई परिचित नहीं था। सबसे पहले रहने की व्यवस्था की और फिर बेटे का स्कूल में दाखिला कराया जिससे उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो। लोगों से जानकारी जुटाकर उन्होंने अभिनय की दुनिया को समझा और ऑडिशन की प्रक्रिया सीखी।
संघर्ष के दिनों में आर्थिक स्थिति भी बेहद कठिन हो गई। एक समय ऐसा आया जब उनके पास पैसे तक खत्म हो गए। दीपक बताते हैं कि एक बार ऑडिशन के लिए जाते समय रास्ते में नदी आ गई। समय कम था इसलिए उन्होंने बेटे को गोद में उठाकर नदी पार कराई और समय पर ऑडिशन तक पहुंचाया।
50 से ज्यादा ऑडिशन के बाद मिली पहचान
उन्होंने बताया कि लगातार तीन-चार महीनों में करीब 50 से 55 ऑडिशन देने के बाद यज्ञ को एक टीवी सीरियल में काम मिला। शुरुआत में उसे केवल तीन दिन का रोल दिया गया था लेकिन उसके अभिनय से प्रभावित होकर निर्देशक ने उसे तीन दिन की जगह तीन महीने तक शो में बनाए रखा। इसके बाद यज्ञ को फिल्म पंगा में काम करने का अवसर मिला और फिर एक टीवी शो से उन्हें दर्शकों का प्यार मिला।









