हरिद्वार में लोक निर्माण विभाग में 23 साल पहले हुए घोटाले में सीबीआई स्पेशल जज मदन राम की कोर्ट ने सहायक कोषाधिकारी समेत आठ लोगों को सजा सुनाई है। अलग-अलग धाराओं में अधिकतम सजा दो साल कठोर कारावास है।
कोर्ट ने सहायक कोषाधिकारी पर 40 और बाकी पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस मामले में कुल 20 सरकारी अधिकारी कर्मचारी व अन्य व्यक्ति आरोपी थे। इनमें से चार की मौत हो चुकी है। जबकि, सात लोगों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था जिन्हें पहले सजा हो चुकी है। सीबीआई के अधिवक्ता अभिषेक अरोड़ा ने बताया कि घोटाले के संबंध में वर्ष 2002 में हरिद्वार की रानीपुर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में एक याचिका पर हाईकोर्ट ने सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे जिनके क्रम में नौ अगस्त 2003 को सीबीआई ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।








