लद्दाख की पुगा घाटी में देश के पहले दो जियोथर्मल कुएं शुरू..

लद्दाख की पुगा घाटी में भारत के पहले और सबसे गहरे दो जियोथर्मल (भू-तापीय) कुओं का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इन कुओं को राष्ट्र को समर्पित किया। ओएनजीसी एनर्जी सेंटर द्वारा विकसित दोनों कुएं 14 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर 1000-1000 मीटर की गहराई तक खोदे गए हैं। इनके शुरू होने से लद्दाख में देश के पहले एक मेगावाट क्षमता वाले डेमो स्केल जियोथर्मल पॉवर प्लांट की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है।

यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्बन न्यूट्रल लद्दाख के विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। जियोथर्मल ऊर्जा के उपयोग से लद्दाख को स्वच्छ ऊर्जा का केंद्र बनाने के साथ ही भविष्य में क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों को नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
पूर्व में लद्दाख प्रशासन और ओएनजीसी एनर्जी सेंटर के बीच हुए समझौते की अवधि समाप्त होने से परियोजना कुछ समय के लिए ठप हो गई थी। बाद में उपराज्यपाल वीके सक्सेना के हस्तक्षेप से जून 2026 में एमओयू को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाया गया, जिसके बाद कुओं की ड्रिलिंग का कार्य दोबारा शुरू हुआ।
400 मीटर की गहराई पर 135 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ तापमान
प्रोजेक्ट इंजीनियरों ने बताया कि 400 मीटर की गहराई पर अधिकतम तापमान 135 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आगे की टेस्टिंग चल रही है। इंजीनियरों को उम्मीद है कि एक मेगावाट के पायलट जियोथर्मल पॉवर प्रोजेक्ट के संचालन और जियोथर्मल ऊर्जा के व्यवसायिक इस्तेमाल के लिए और भी ज्यादा तापमान मिलगा। यह प्रोजेक्ट दुनिया के सबसे मुश्किल कामकाजी माहौल में शुरू किया गया है। बेहद खराब मौसम और ऊबड़-खाबड़ जमीन पर काम करने का समय भी काफी कम मिलता है।

पहले कुएं की खोदाई मई और दूसरे की जुलाई में हुई पूरी
जियोथर्मल गतिविधियों, जमीन के नीचे की मुश्किल स्थितियों और काम से जुड़ी चुनौतियों के बीच पहला कुआं 22 मई 2026 को 1000 मीटर की तय गहराई तक सफलतापूर्वक खोदा गया। इसके बाद 03 जून 2026 को दूसरे जियोथर्मल कुएं की खोदाई शुरू हुई। करीब एक में 08 जुलाई 2026 को इसे 1000 मीटर की गहराई तक सफलतापूर्वक खोदकर पूरा कर लिया गया।

क्या है जियोथर्मल ऊर्जा
जियोथर्मल ऊर्जा पृथ्वी के भीतर मौजूद प्राकृतिक गर्मी से प्राप्त होने वाली स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा है। इसमें भूमिगत गर्म पानी और भाप की मदद से बिजली बनाई जाती है। यह ऊर्जा 24 घंटे उपलब्ध रहती है। इससे कार्बन उत्सर्जन बेहद कम होता है। इसलिए इसे भविष्य के स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में सबसे भरोसेमंद माना जाता है।

यह उपलब्धि भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह परियोजना लद्दाख की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और क्षेत्र के सामाजिक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ओएनजीसी के इंजीनियर और परियोजना से जुड़े कर्मचारी बधाई के पात्र हैं। यह परियोजना भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता का बेजोड़ उदाहरण है।
– वीके सक्सेना, उपराज्यपाल लद्दाख
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