कैबिनेट की बैठक: शुरू हुई कैबिनेट की बैठक,पटिए पर बैठे सीएम, देवी अहिल्या की प्रतिमा रखी सामने

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मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्री परिषद की बैठक राजवाड़ा में वंदे मातरम के गान के साथ आरंभ हुई। ये बैठक राजवाड़ा के गणेश हॉल में हो रही है। तय व्यवस्था के अनुसार बैठक के लिए सीएम और सभी मंत्री पटिए और गद्दे पर बैठे। देवी अहिल्या की प्रतिमा सीएम के सामने रखी हुई है।

 

मालवी पगड़ी में नजर आए सीएम मोहन यादव
कैबिनेट मीटिंग के लिए पहुंचने वाले सीएम मोहन यादव और मंत्रियों का मालवी पगड़ी पहनाकर स्वागत किया गया। इसके पहले अहिल्या प्रतिमा पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया माल्यार्पण, फिर कैबिनेट बैठक के लिए हॉल में गए। बैठक में शामिल होने के लिए मंत्री विजय शाह नहीं पहुंचे। उन्हें बैठक का एजेंडा भी नहीं भेजा गया है।लालबाग परिसर से राजवाड़ा तक मुख्यमंत्री और मंत्री एक बस में सवार होकर आए। सबसे आगे की सीट पर मुख्यमंत्री बैठे थे। फिर डिप्टी सीएम बैठे। बस दस मिनट में राजवाड़ा पहुंच गई।

सीएम पहुंचे राजबाड़ा
सीएम मोहन यादव राजवाड़ा पहुंच चुके हैं। इसके पहले वे जू और लालबाग पैलेस भी गए थे। सीएम ने  छात्रों से चर्चा भी की है।  मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के ऐतिहासिक राजबाड़ा में  मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हो रही है।  बैठक की शुरुआत लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पर माल्यार्पण (फूल चढ़ाकर सम्मान) से होगी। यह बैठक राजवाड़ा के भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर है। इसमें राज्य के विकास, जनता के भले और बेहतर शासन से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। इसमें भोपाल, इंदौर और ओंकारेश्वर से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।
मेट्रोपॉलिटन रीजन एक्ट पर मुहर संभव
इंदौर के राजवाड़ा में हो रही कैबिनेट बैठक में मध्यप्रदेश मेट्रोपॉलिटन नियोजन एवं विकास अधिनियम 2025 (Metropolitan Act) को मंजूरी मिल सकती है। मध्यप्रदेश देश का 13वां राज्य बन जाएगा, जहां यह अधिनियम लागू होगा। इसके लागू होते ही भोपाल और इंदौर को  मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

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इस योजना के तहत एकीकृत मास्टर प्लान (सभी विभागों की साझा योजना) तैयार की जाएगी। अगले 14 महीनों में एक खास प्लान बनाया जाएगा जिसमें रोजगार, पर्यटन, स्वास्थ्य, घर और उद्योग जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए 18 विभागों से जानकारी मांगी गई है।

विजन 2047: भविष्य के 20 साल की योजना

बैठक में एक और खास मुद्दा होगा – “विजन 2047”, यानी राज्य अगले 20 साल में कहां पहुंचेगा, इस पर चर्चा होगी। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, पर्यावरण और महिलाओं के सशक्तिकरण पर लंबी अवधि की योजनाएं बनाई जाएंगी। सभी मंत्री अपने अपने विभाग का भविष्य का लक्ष्य बताएंगे।

स्वच्छता अभियान 2029 तक बढ़ सकता है

मुख्यमंत्री स्वच्छता अभियान को 2029 तक बढ़ाने पर भी बैठक में विचार किया जाएगा। इस योजना को आगे बढ़ाने में 227 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसमें से 167 करोड़ रुपये राज्य सरकार खर्च करेगी।

देवी अहिल्याबाई होलकर वाइल्डलाइफ सेंचुरी बनने की तैयारी

राज्य सरकार इंदौर और खरगोन की सीमा पर फैली कारकूट रेंज के करीब 7,000 हेक्टेयर क्षेत्र को देवी अहिल्याबाई होलकर वाइल्डलाइफ सेंचुरी घोषित करने जा रही है। यह मध्यप्रदेश की 26वीं सेंचुरी होगी और इसे अहिल्याबाई की 300वीं जयंती पर पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक माना जाएगा।इस सेंचुरी में जनापाव की पहाड़ियां, चोरल के जंगल और सुंदर घाटियाँ भी शामिल होंगी। जनापाव को भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है और यहीं से चंबल समेत 8 नदियों का उद्गम होता है। मुख्यमंत्री इस सेंचुरी की आधिकारिक घोषणा भी कर सकते हैं।

मालवी परंपरा में स्वागत और भव्य भोजन की व्यवस्था

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कैबिनेट बैठक में आने वाले सभी मेहमानों का स्वागत मालवी परंपरा के अनुसार किया जाएगा। बैठक के बाद राजवाड़ा के प्रथम तल पर पारंपरिक मालवी भोजन का आयोजन होगा। इसमें खासतौर पर स्थानीय व्यंजन जैसे दाल बाटी, दही बड़ा, मावा बाटी आदि परोसे जाएंगे।
राजवाड़ा परिसर में एक अस्थायी सचिवालय भी बनाया गया है, जहां बैठक से जुड़ी सभी प्रशासनिक कामकाज होंगे। सुरक्षा के लिए खास पुलिस दल तैनात किए गए हैं। बैठक की परिवहन, आवास और सुरक्षा की जिम्मेदारी अलग अलग अधिकारियों को दी गई है।

मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मदद के लिए लाइजनिंग अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं। राजवाड़ा भवन का निर्माण श्रीमंत मल्हारराव होलकर महाराज ने शुरू किया था और इसे लोकमाता अहिल्या बाई होलकर ने पूरा किया था। उसी जगह अब मंत्रिमंडल की बैठक हो रही है, जहां उन्हें सम्मान दिया जाएगा।

1945 में हुई थी आखिरी बैठक

देवी अहिल्या बाई के समय में राजवाड़ा शासन और न्याय का मुख्य केंद्र था। उन्हीं की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए होलकर परिवार के सदस्य इस दरबार हॉल में कई अहम फैसले लेते थे। 1945 में यशवंतराव तृतीय ने यहां आखिरी बार मंत्रिमंडल की बैठक की थी।


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