भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने रविवार को प्रेस वर्ता की। उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छार पर गांधी परिवार की चुप्पी को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कैप्टन स्मित मच्छार ने पूरे देश और दुनिया को हैरान कर दिया है। पूरा देश उनकी उपलब्धि पर गर्व करता है। लेकिन कांग्रेस के ‘पहले परिवार’ की तरफ से कैप्टन स्मित मच्छार के बारे में एक भी शब्द नहीं कहा है।
उन्होंने आगे कहा कि उस परिवार की मुखिया सोनिया गांधी ने कभी बाटला हाउस एनकाउंटर के आरोपियों के लिए आंसू बहाए थे, फिर भी कैप्टन स्मित मच्छार के लिए उनकी आंखों में हमदर्दी की कोई झलक नहीं दिखती। और फिर हैं ‘बिगड़ैल राजकुमार’ राहुल गांधी, जो गाजा को लेकर इतने दुखी थे और ट्वीट्स, कांग्रेस वर्किंग कमेटी के प्रस्तावों और अखबारों के लेखों के जरिए अपना दुख जाहिर कर रहे थे, वे अब ‘वोट बैंक’ से इतने डरे हुए लगते हैं कि इस मामले पर उनके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकलता।
त्रिवेदी ने कहा कि मेरा मानना है कि पूरे देश को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के इस व्यवहार को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। यह साफ है कि यह दो विचारधाराओं के बीच का टकराव है। एक विचारधारा, जो दबे-छिपे तौर पर आतंकवाद का समर्थन करती है, कुल्हाड़ी की तरह प्रहार करती है, भारत के संवैधानिक संस्थानों और सामाजिक ताने-बाने को तहस-नहस करती है और असल में देश रूपी जहाज को दुर्घटना की ओर ले जाती है। और दूसरी विचारधारा वह है जिसका हम प्रतिनिधित्व करते हैं, जो जहाज को बचाने के लिए चोटें सहने और अपनी जान-माल का जोखिम उठाने को तैयार है।
त्रिवेदी ने कांग्रेस से पूछा कि जो लोग जाकिर नाइक को शांति का मसीहा मानते थे। अफजल गुरु को हालात का मारा बताते थे, बुरहान वानी को भटका हुआ युवा कहते थे, याकूब मेमन की फांसी को ‘न्यायिक हत्या’ करार देते थे और बाटला हाउस एनकाउंटर पर आंसू बहाते थे, वे अब एक शब्द भी क्यों नहीं बोल रहे हैं? कैप्टन स्मित मच्छार के लिए कोई बात क्यों नहीं कही जा रही, जिन्होंने इतनी बहादुरी दिखाई और कई लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली? हम इस मामले पर कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से सीधा जवाब चाहते हैं।’






