शराब नीति मामले में केजरीवाल-सिसोदिया को कोर्ट से बड़ी राहत,किया आरोप मुक्त 

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दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को बहुचर्चित आबकारी नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) संयोजक अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कई अन्य को आरोप मुक्त कर दिया है। हालांकि अरविंद केजरीवाल को अभी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि प्रथम दृश्य कोई भी आपराधिक षड्यंत्र नहीं मिला है। कोर्ट सीबीआई मामले में सुनवाई कर रही थी। उधर, सीबीआई सूत्र के मुताबिक, सीबीआई इस फैसले को चुनौती देने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट जाएगी।

 

इससे पहले 12 फरवरी को हुई सुनवाई में अदालत ने आरोप तय करने के मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और सभी आरोपियों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा था। सुनवाई में सीबीआई ने अदालत में दावा किया कि पहली चार्जशीट और पूरक आरोप पत्र में साजिश के पर्याप्त आधार मौजूद हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कुल 23 आरोपियों की ओर से आरोपों को निराधार बताया था। सीबीआई का आरोप है कि साउथ लॉबी ने दिल्ली की आबकारी मामला अपने पक्ष में कराने के लिए 100 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी।

 

अरविंद केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया था कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियां निभा रहे थे और उन्हें किसी भी तरह की रिश्वत मांगने या लेने से जोड़ने वाला कोई प्रमाण नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि केजरीवाल का नाम पहली चार्जशीट और तीन पूरक चार्जशीट में नहीं था, बल्कि चौथी पूरक चार्जशीट में जोड़ा गया, जो पहले की चार्जशीट का दोहराव है। बहस के दौरान अप्रूवर बने राघव मगुंटा के बयान का भी जिक्र हुआ था। बचाव पक्ष ने कहा कि ऐसा कोई सीधा लिंक नहीं है जिससे साबित हो कि केजरीवाल ने किसी से पैसे लेने को कहा था।

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