अयोध्या: मंदिरों में विराजमान भगवान के विग्रहों को नौका विहार कराकर उनका पूजन किया गया।

Spread the love

अयोध्या: मंदिरों में विराजमान भगवान के विग्रहों को नौका विहार कराकर उनका पूजन किया गया।

भादौ शुक्ल एकादशी के पर्व पर आज जलझूलनी उत्सव श्रद्धा एवं उल्लास के वातावरण ग में मनाया गया। इस अवसर पर मंदिरों में विराजमान भगवान के विग्रहों को नौका विहार कराकर उनका पूजन किया गया। इस परम्परा का निर्वहन रामनगरी की प्रतिष्ठित पीठ कनकभवन में किया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर स्थित जानकी बाग के कुंड में नौका को फूलों की लरियों से सजाकर गोधूलि बेला में भगवान के उत्सव विग्रहों को प्रतिष्ठित कर उनकी आरती उतारी गयी और फिर जल विहार कराया गया। इस बांकी-झांकी का दर्शन करने के लिए श्रद्धालु गण भी पहुंचे।
करीब एक घंटे के कार्यक्रम के बाद सवा छह बजे भगवान पुनः मंदिर परिसर में लाकर उनकी आरती उतारी गयी। इसी तरह से मणिराम छावनी में भी श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास के सानिध्य में बड़े हनुमानजी स्थित कुंड़ में भगवान को जलविहार कराया गया। उधर
आंजनेय सेवा संस्थान की ओर से स्वर्गद्वार घाट पर जलविहार की झांकी सजाई जिसमें भगवान के स्वरुपों को नाव पर बैठाकर विहार कराया गया। विहार के समापन पर भगवान की उतारी गयी। इसके पूर्व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। संस्थान के अध्यक्ष महंत शशिकांत दास ने कलाकारों को सम्मानित किया। इस दौरान मंदिर परम्परा के साधकों कुशल उपाध्याय, दीपक चौबे व राजकुमार झा सहित अन्य ने अपने मधुर भजनों से उपस्थित समूह को आनंदित किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने झांकी व आरती का दर्शन किया।


इसके पहले हनुमत सदन से महंत अवध किशोर शरण के नेतृत्व में भगवान के विग्रहों को शोभायात्रा के रूप में सरयू तट ले जाएगा। पुनः राजघाट पर एक नौका में भगवान श्रीसीताराम के विग्रहों व दूसरी पर उनके स्वरुपों को बैठाकर सरयू नदी में जल विहार कराया गया। इस दौरान साधु-संत मधुर पदों का गायन कर आराध्य को रिझाते रहे।
स्कन्द पुराण के अनुसार चातुर्मास के दौरान जब श्री विष्णु योग निद्रा में जाते हैं, उसके बाद जलझूलनी एकादशी के दिन वह सोते हुए करवट बदलते हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस एकादशी व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है। कहते हैं भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं इस व्रत का माहात्म्य युधिष्ठिर को बताया है। इस दिन भगवान करवट लेते हैं, इसलिए इसको परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं। मान्यता यह भी है को जो भक्त भाद्रपद शुक्ल एकादशी का व्रत और पूजन करते हैं, उन्हें ब्रह्मा, विष्णु सहित तीनों लोकों में पूजन का फल प्राप्त होता है।

और पढ़े  दर्दनाक हादसा: बस से उतरते ही छात्र को रौंदा, मासूम की मौके पर हुई मौत, कॉलेज में की तोड़फोड़

Spread the love
  • Related Posts

    जवाहर भवन के चौथे तल पर लगी भीषण आग, दमकलकर्मी आग बुझाने में जुटे, ब्रजेश पाठक मौके पर पहुंचे

    Spread the love

    Spread the loveराजधानी लखनऊ में सोमवार सुबह करीब 9:40 बजे जवाहर भवन के चौथे तल पर आग लग गई। आग की लपटें और धुआं देख लोगों में अफरातफरी मच गई।…


    Spread the love

    सामूहिक दुष्कर्म- दोस्तों ने भी लूटी अस्मत, सामूहिक दुष्कर्म के बाद फरेबी ने दिया एक और दर्द

    Spread the love

    Spread the loveआगरा के इरादतनगर गांव के युवक ने 18 वर्षीय युवती को अपने जाल में फंसाया। उसे बहला कर खेत में लेकर गया। खुद संबंध बनाए और फिर दोस्तों…


    Spread the love

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *