सूत्रों के अनुसार, गर्भगृह के पास रखे इस विशेष लॉकर में केवल बहुमूल्य आभूषण और कीमती भेंट ही सुरक्षित रखी जाती हैं। एसआईटी ने जांच के दौरान लॉकर में रखी वस्तुओं का ट्रस्ट के अभिलेखों और संबंधित रसीदों से मिलान किया। जिन श्रद्धालुओं ने आभूषण दान किए हैं, उन्हें जारी की गई रसीदों के आधार पर यह सत्यापित किया गया कि संबंधित वस्तुएं लॉकर में सुरक्षित मौजूद हैं। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने जांच के दौरान दान रसीदों, अभिलेखों और लॉकर में सुरक्षित आभूषणों का बिंदुवार मिलान किया।
मंदिर में जब कोई श्रद्धालु सोना, चांदी अथवा अन्य बहुमूल्य आभूषण भगवान रामलला को अर्पित करता है, तो पहले उसकी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तौल की जाती है। इसके लिए गर्भगृह के समीप ही इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन की व्यवस्था की गई है। तौल और अभिलेखीकरण के बाद श्रद्धालु को तत्काल रसीद जारी की जाती है और संबंधित आभूषण को लॉकर में सुरक्षित रख दिया जाता है।