इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन करने वाली सगी बहनों को पिता की ओर से हिरासत में रखने को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया। कोर्ट ने कहा कि बालिग को अपनी आस्था, धर्म, निवास और जीवन से जुड़े फैसले स्वयं लेने का अधिकार है। माता-पिता अपनी संतान के धार्मिक या व्यक्तिगत फैसलों से असहमत हो सकते हैं, लेकिन उनकी स्वतंत्रता नहीं छीन सकते।
एक बहन ने कहा कि मैं 35 वर्ष की है, जूलॉजी में एमएससी, एमफिल और बीएड कर चुकी हूं। मैंने धर्म परिवर्तन का निर्णय मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुष्टि के लिए लिया था। दोनों बहनों के अनुसार पिता उनके फैसले से सहमत नहीं थे। उन्हें वापस हिंदू धर्म अपनाने के लिए दबाव डालते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जबरन घर में रोका गया। बाहर जाने और अपनी पसंद से जीवन जीने की स्वतंत्रता नहीं दी गई।







