लड़कियों की हो रही थी स्टाम्प पेपर से नीलामी इस मामले को लेकर गहलोत सरकार को मानवाधिकार आयोग का नोटिस जारी

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राजस्थान में कथित रूप से स्टाम्प पेपर के जरिए लड़कियों की नीलामी का मामला सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अशोक गहलोत सरकार को नोटिस जारी किया है। NHRC ने सरकार से पूछा है, उसने इस तरह के अपराधों के खिलाफ क्या-क्या कार्रवाइयां की हैं और इन्हें रोकने के लिए क्या व्यवस्था है। आयोग ने सरकार से राजस्थान की ग्राम पंचायतों के काम करने के तरीकों के बारे में भी जानकारी देने को कहा है।

वहीं, अब राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी शुक्रवार को कर्ज चुकौती के विवादों को निपटाने के लिए स्टाम्प पेपर पर लड़कियों की कथित नीलामी की रिपोर्ट की जांच के लिए दो सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। साथ ही कहा कि यह बेहद भयावह और दर्दनाक है। आयोग ने कहा, यह बताया गया है कि गांव की कई बस्तियों में लड़कियों को स्टांप पेपर पर वेश्यावृत्ति के लिए बेचा जाता है। राष्ट्रीय महिला आयोग को कई मीडिया पोस्ट मिले हैं, जिसमें यह बताया गया है कि राजस्थान के भीलवाड़ा में कर्ज चुकौती के विवादों को निपटाने के लिए लड़कियों की नीलामी की गई थी। गांव की कई बस्तियों में लड़कियों को वेश्यावृत्ति के लिए बेचा जाता है। कुछ मामलों में विवादों के निपटारे के लिए जाति पंचायतों के फरमान पर उनकी माताओं के साथ दुष्कर्म किया जाता है। एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष रेखा शर्मा ने भी राजस्थान के मुख्य सचिव को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने और की गई कार्रवाई से आयोग को अवगत कराने के लिए पत्र लिखा है। आयोग ने राजस्थान के पुलिस महानिदेशक को भी प्राथमिकी में प्रासंगिक प्रावधानों को तुरंत लागू करने और सभी आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के लिए कहा है। इस बीच, राजस्थान राज्य महिला आयोग ने भी मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लिया कि राजस्थान के कुछ जिलों में नाबालिग लड़कियों को स्टाम्प पेपर पर बेचा जाता है। इसको लेकर पुलिस महानिदेशक और भीलवाड़ा कलेक्टर को नोटिस जारी किया है। राज्य आयोग ने भी तत्काल कार्रवाई और सात दिनों में एक तथ्यात्मक रिपोर्ट की मांग की है।

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बता दें कि राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल ने गुरुवार को भीलवाड़ा की घटना की निंदा की और कहा कि तत्काल संज्ञान लिया गया। हालांकि, राजस्थान के मंत्री प्रताप खाचरियावास ने राज्य में लड़कियों की बिक्री की खबरों का खंडन किया है। उन्होंने कहा, यह जांच का विषय है। जब ऐसी जानकारी सामने आती है तो हम जांच होने तक सच्चाई नहीं जान सकते हैं। एनएचआरसी को इस बारे में पहले राजस्थान पुलिस से बात करनी चाहिए थी। राज्य में लड़कियों की बिक्री नहीं होती है।
बताते चलें कि इस साल 26 अक्टूबर को मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, राजस्थान की जाति पंचायतें सीरिया और इराक की तरह इस अपराध को अंजाम दे रही हैं। जहां लड़कियों को गुलाम बनाया जाता है। कथित तौर पर भीलवाड़ा में, जब भी दोनों पक्षों के बीच कोई विवाद होता है तो पुलिस के पास जाने के बजाय जाति पंचायतों से समझौता करने के लिए संपर्क किया जाता है। यह लड़कियों को गुलाम बनाने का शुरुआती बिंदु बन जाता है। यदि वे अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने में विफल रहते हैं तो लड़कियों की माताओं के साथ दुष्कर्म करने का आदेश दिया जाता है।


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