देहरादून- जमीन कब्जाने की कोशिश, फर्जी रजिस्ट्री घोटाले के मास्टरमाइंड केपी सिंह गिरोह के 12 लोग नामजद

कुख्यात भू-माफिया और फर्जी रजिस्ट्री घोटाले का मास्टरमाइंड केपी सिंह भले ही अब इस दुनिया में नहीं है पर उसके गिरोह के लोग अब भी दून में जमीन कब्जाने का षड्यंत्र रच रहे हैं। दिल्ली निवासी अशोक गोयल की शिकायत पर पटेलनगर थाने में गिरोह से जुड़े 12 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

शिकायतकर्ता अशोक गोयल ने आरोप लगाया है कि विकासनगर तहसील के मल्हान ग्रांट स्थित उनकी भूमि पर सुनियोजित तरीके से फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह भूमि राजस्व अभिलेखों में उनके नाम दर्ज है और परिवार के बीच इसका विधिवत बंटवारा भी हो चुका है।
प्राथमिकी के अनुसार शिकायतकर्ता के दिवंगत चाचा संदीप गोयल की बीमारी का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उन्हीं के आधार पर जमीन पर अधिकार जताने की कोशिश की। आरोप है कि 12 जुलाई को जेसीबी लाकर भूमि की तारबाड़ भी क्षतिग्रस्त की गई तथा कर्मचारियों को जान से मारने की धमकी दी गई।
पुलिस ने इस मामले में प्रफुल्ल शर्मा, अभिनव सिंह, अभय सिंह, पूनम चौधरी, रईस अहमद, मंजर आलम, नरेश राणा, हरेंद्र नेगी, मनोज बुटोला, विजय सिंह नेगी, उमेद सिंह नेगी और रविंद्र सिंह बिष्ट को नामजद किया है। पटेलनगर थाना प्रभारी विनोद गुसाईं ने बताया कि शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

2023 में एसआईटी दर्ज करवा चुकी है प्राथमिकी

संदीप गोयल का दिल्ली में देहांत हो गया था। उनकी दून में कई बेशकीमती संपत्तियां हैं। केपी सिंह के गिरोह ने राजपुर रोड स्थित एक पारिवारिक संपत्ति की भी फर्जी वसीयत तैयार कर कब्जे की कोशिश की थी। रजिस्ट्री फर्जीवाड़े की जांच के लिए बनी कमेटी ने अक्तूबर 2023 में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। तब संदीप गोयल के भतीजे गौरव गोयल ने फर्जी वसीयत पर सवाल उठाए थे। बता दें कि ये गिरोह ऐसे ही लोगों को संपत्ति को निशाना बनाता है जिसके वारिश विदेश में रह रहे हों या निधन हो गया हो।

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सहारनपुर से शुरू की रिकॉर्ड में हेराफेरी

देहरादून जिले के कई दशकों के भू दस्तावेज सहारनपुर कलक्ट्रेट में रखे थे। बताया जा रहा है कि केपी सिंह और उसके गिरोह से जुड़े लोगों ने इसका फायदा उठाते हुए वहीं से रिकॉर्ड में हेराफेरी शुरू की। दून में कई बेशकीमती जमीनों के पेपर या तो गायब करवा दिए या उसकी जगह नकली रजिस्ट्री रिकार्ड में रखवा दी। आरोप है कि इस गिरोह ने दून में फर्जीवाड़ा कर 500 करोड़ से ज्यादा की जमीनें बेच डाली हैं।

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