अलर्ट- निजी वाहनों को दे दिए सरकारी गाड़ियों के नंबर,रामपुर के ARTO का निलंबन तय, जानें क्या है पूरा मामला

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रकारी गाड़ियों के लिए आरक्षित नंबर निजी वाहनों के लिए जारी करने के मामले में रामपुर के एआरटीओ प्रशासन राजेश श्रीवास्तव पर निलंबन की तलवार लटक गई है। परिवहन आयुक्त ने बीएन सिंह ने निलंबन की संस्तुति शासन से की है। साथ ही मेजर पेनाल्टी लगाने की सिफारिश भी की है।

 

एआरटीओ के साथ परिवहन विभाग के कुछ कर्मचारी भी निलंबन के दायरे में आ रहे हैं। यह मसला यूपी-22 बीजी सीरीज से जुड़ा है। सरकारी वाहनों के लिए आरक्षित बीजी सीरीज के नौ हजार से ज्यादा रजिस्ट्रेशन नंबर निजी लोगों के वाहनों को जारी कर दिए गए थे। बीजी सीरीज के नंबरों के निजी वाहनों पर इस्तेमाल की जानकारी के बाद बरेली के उप परिवहन आयुक्त ने शुरुआती जांच की।

 

इसमें सामने आया कि रामपुर में अप्रैल में बीएफ सीरीज समाप्त होने के बाद निजी वाहनों के लिए बीएच सीरीज के नंबर आवंटित होने चाहिए थे लेकिन विभाग ने बीजी सीरीज खोल दी। इस सीरीज से 9,469 प्राइवेट वाहनों के पंजीकरण दर्ज हो गए, जो नियम विरुद्ध है।

जांच में पाया गया कि सभी फाइलों का अंतिम अनुमोदन रामपुर के एआरटीओ प्रशासन राजेश श्रीवास्तव की यूजर आईडी से हुआ। परिवहन आयुक्त बीएन सिंह तक मामला पहुंचने के बाद उनके स्तर से एआरटीओ राजेश व संबंधित कर्मचारियों के निलंबन और मेजर पेनाल्टी की सिफारिश शासन से की गई है। 

यूपी 22 बीजी सीरीज निलंबित, बदलेगी कई की नंबर प्लेट
परिवहन आयुक्त बीएन सिंह ने बताया कि गड़बड़ी की बात जांच में सही पाए जाने पर यूपी 22 बीजी सीरीज को निलंबित या फ्रीज किया गया है। इस सीरीज से जुड़े आम लोगों को नए नंबर जारी किए जाएंगे। उनके लिए नई नंबर प्लेट की व्यवस्था होगी। इसका कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लिया जाएगा। यह सारी प्रक्रिया दो माह में पूरी करनी होगी। मुरादाबाद के आरटीओ प्रशासन राजेश सिंह और बरेली के उप परिवहन इसके नोडल की भूमिका में रहेंगे। फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी।

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डीबीए और महिला कर्मी पर भी कार्रवाई
मुरादाबाद के आरटीओ राजेश सिंह ने बताया कि इस मामले में रामपुर के डीबीए रामेश्वर नाथ द्विवेदी को भी तत्काल दायित्वों से मुक्त कर दिया गया है। कनिष्ठ सहायक नेहा चौहान भी कार्रवाई के दायरे में आई हैं। डीलिंग बाबुओं पर भी निलंबन व जुर्माने की कार्रवाई होगी।

पुलिस व गृह विभाग को अलर्ट किया
परिवहन आयुक्त बीएन सिंह ने यह भी बताया कि गृह विभाग, पुलिस, इंटेलिजेंस, हाईवे अथॉरिटी को भी मामले की जानकारी दी गई है। दरअसल एजी, बीजी, सीजी आदि आरक्षित सीरीज के नंबरों से प्लेट देखते ही सरकारी वाहनों की पहचान हो जाती है। मौजूदा स्थिति रामपुर की बीजी सीरीज के नंबरों से दौड़ रही गाड़ियों को वाहन चेकिंग के दायरे से बाहर रखने का खतरा भी पैदा हो गया है।

बीजी सीरीज के 9469 पंजीकरण निरस्त
रामपुर जिले में सरकारी विभाग को आवंटित यूपी 22 बीजी सीरीज के नंबर निजी वाहनों के स्वामियों को आवंटित करने का मामला सामने आने के बाद परिवहन आयुक्त ने इन नंबरों को निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं। 60 दिन के भीतर विभाग इन वाहनों को नए नंबर जारी करेगा। इसके लिए लोगों से चार्ज भी नहीं लिया जाएगा।

लोगों को परेशानी से बचाने के लिए एआरटीओ कार्यालय में नए काउंटर खोले जाएंगे। परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने बताया कि 9469 पंजीकरण दोबारा किए जाएंगे। इन वाहन स्वामियों के अंतिम चार नंबर पुराने ही होंगे। वाहन स्वामियों से कोई फीस नहीं ली जाएगी। विभाग आरसी और नई हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाकर देगा। वाहन स्वामी को पुरानी नंबर प्लेट वापस करनी होगी।

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फास्टैग भी मुफ्त में होगा अपडेट
परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने बताया कि एनएचएआई और आईएचएमसीएल को पुरानी और नए नंबर की सूची भेजी जाएगी। इसके बाद फास्टैग बिना शुल्क दिए नए नंबर में बदल दिया जाएगा। वाहन स्वामियों को अलग से फास्टैग लगाने की जरूरत नहीं होगी।

नंबर नहीं बदलवाया तो वाहन स्वामी पर होगी कार्रवाई
परिवहन आयुक्त ने बताया कि वाहन स्वामियों को फोन, मैसेज और अखबार में सूचना प्रकाशित कर जानकारी दी जाएगी। कहा कि वाहन स्वामी ने 60 दिन के भीतर रामपुर आकर अपना नंबर नहीं बदलवाया तो कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत वाहन का पंजीयन तक निलंबित किया जा सकता है।

बीमा, फिटनेस पर नहीं होगा असर
वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर बदलते ही विभाग इसकी जानकारी बीमा कंपनियों को देगा। इसके साथ ही फिटनेस, बीमा, कर और स्वामित्व पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

उप परिवहन आयुक्त से हुई शिकायत तो जागा विभाग
बीजी सीरीज के नंबर बांटने की शिकायत रामपुर से एक व्यक्ति ने सीधे परिवहन विभाग के अधिकारियों से की थी। फोटो भी भेजा था। सूत्रों के अनुसार शिकायतकर्ता परिवहन कार्यालय से जुड़ा हुआ था। शिकायत के बाद भी जब कार्रवाई नहीं हुई तो उस व्यक्ति ने इस बात को मीडिया में प्रकाशित कराया।

मीडिया में मामला सामने आने के बाद परिवहन आयुक्त ने 10 सितंबर को जांच के आदेश जारी किए। जांच में मामला सही पाया गया। जांच में सामने आया कि यूपी 22 बीजी सीरीज 27 अप्रैल से शुरू हुई और 12 अगस्त तक इस सीरीज के सभी नंबर बांट दिए गए।

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