अयोध्या।
भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या एक बार फिर आस्था के रंग में रंगी हुई है। कार्तिक मास की अक्षय नवमी तिथि पर शुरू हुई 42 किलोमीटर लंबी 14 कोसी परिक्रमा में गुरुवार तड़के से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। प्रशासन के अनुसार अब तक करीब 10 लाख श्रद्धालु सरयू स्नान कर नंगे पांव परिक्रमा पथ पर निकल चुके हैं।
भोर से ही परिक्रमा मार्गों पर “जय श्रीराम” के जयकारों से गूंज उठी अयोध्या में भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है।
बारिश और कीचड़ में भी अडिग श्रद्धा
गुरुवार सुबह से लगातार बारिश हो रही है। कई जगह जलभराव और कीचड़ ने मार्ग को दुर्गम बना दिया है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के कदम नहीं रुके।
श्रद्धालु पॉलीथिन, बोरी और तिरपाल ओढ़े हुए, नंगे पांव कीचड़ से होते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
कई श्रद्धालु मार्ग की रज (मिट्टी) माथे पर लगाकर आशीर्वाद लेते हैं और हाथ जोड़कर प्रभु श्रीराम से अपने पापों से मुक्ति की कामना करते हैं।
शहर के प्रमुख स्थानों — राम मंदिर, हनुमानगढ़ी, कनक भवन और नागेश्वरनाथ मंदिर में दर्शन के लिए भी भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं।
प्रशासन और पुलिस चौकन्ना
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए अयोध्या प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
परिक्रमा मार्ग पर ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। खुफिया विभाग और डॉग स्क्वायड टीमों ने मार्ग की गहन जांच की है।
अयोध्या जिला प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक नियंत्रण और स्वास्थ्य सेवाओं की विशेष व्यवस्था की है।
परिक्रमा मार्ग पर पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और रैन बसेरा केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। धार्मिक महत्व और परंपरा
सनातन परंपरा के अनुसार, कार्तिक महीने में अयोध्या में 14 कोसी और पंचकोसी परिक्रमा करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।
मान्यता है कि परिक्रमा का हर एक कदम जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति दिलाता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
14 कोसी परिक्रमा अयोध्या की धार्मिक परिधि को घेरे हुए लगभग 42 किलोमीटर लंबी है।
यह परिक्रमा अक्षय नवमी के दिन आरंभ होती है और अगले दिन समाप्त होती है।
इस वर्ष पंचांग के अनुसार,
14 कोसी परिक्रमा 30 अक्टूबर तड़के 4:51 बजे शुरू हुई,
जो 31 अक्टूबर तड़के 4:40 बजे तक चलेगी।
इसके 24 घंटे बाद 1 नवंबर को देव उठनी एकादशी पर पंचकोसी परिक्रमा आरंभ होगी,
जो 2 नवंबर रात 2:57 बजे तक चलेगी।
कहां से शुरू होती है परिक्रमा?
परिक्रमा मार्ग का कोई निश्चित प्रारंभ बिंदु नहीं है।
श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सुविधा अनुसार किसी भी स्थान से परिक्रमा शुरू कर सकते हैं।
मार्ग में अयोध्या के अनेक धार्मिक स्थल जैसे गुलाब बाड़ी, चौरेहिया, मणिपर्वत, कोट रामचंद्र, भरतकुंड, रामघाट, राम जन्मभूमि क्षेत्र, हनुमानगढ़ी और कनक भवन आदि आते हैं।
सेवा और श्रद्धा का संगम
परिक्रमा के दौरान अनेक सेवा समितियां और स्वयंसेवी संस्थाएं श्रद्धालुओं के लिए भोजन, चाय और पानी की व्यवस्था कर रही हैं।
मार्ग के किनारे जगह-जगह भजन-कीर्तन और राम नाम संकीर्तन का दौर चल रहा है।
स्थानीय लोग अपने घरों के बाहर दीप जलाकर और प्रसाद वितरण कर श्रद्धालुओं का स्वागत कर रहे हैं।
आस्था और भक्ति का अनुपम संगम
अयोध्या की गलियों और परिक्रमा मार्गों पर भक्ति का जोश साफ झलक रहा है।
बारिश के बीच भी श्रद्धालु जिस समर्पण से परिक्रमा कर रहे हैं, वह इस पावन नगरी की आस्था की अटूट शक्ति का प्रतीक है।
14 कोसी परिक्रमा के समापन के बाद, 1 नवंबर से शुरू होने वाली पंचकोसी परिक्रमा के लिए भी श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर है।
अयोध्या फिलहाल पूरी तरह राममय हो चुकी है।







