1 करोड़ की रिश्वत..दवा व्यापारी ने टेबल पर इसलिए रखा नोटों से भरा बैग, तीन फर्म से करता दवा का कारोबार

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गरा में हे मां मेडिको का मोती कटरा स्थित गोदाम तीन मंजिल का है। इसमें दवाएं ठसाठस भरी हुई हैं। इतनी भारी मात्रा में दवाएं देख टीम भी दंग रह गई। इसका संचालक हिमांशु अग्रवाल कारोबार करने के लिए तीन फर्म का इस्तेमाल करता है। उसने परिजन के नाम से फर्म खोल रखी हैं।

UP news Bribe of Rs one crore drug dealer kept bag full of notes on table He used to do business with 3 firms

सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि हे मां मेडिको का मोती कटरा पर गोदाम है। ये तीन मंजिला है और दवाओं से ठसाठस भरा हुआ है। इसमें कई तरह की दवाएं मिली हैं जिसकी जांच करने के लिए कई जिलों के अधिकारी लगे हुए हैं। इसके संचालक हिमांशु अग्रवाल से तीन फर्म से कारोबार की जानकारी मिली है। इसमें हे मां मेडिको प्राइवेट लिमिटेड के नाम से मुबारक महल स्थित मेडिकल स्टोर और मोती कटरा स्थित ब्रांच है।

केएनके फार्मा प्राइवेट लिमिटेड अमिता अग्रवाल के नाम से फर्म है। ये हिमांशु अग्रवाल के ही परिजन की है। इसके अलावा अन्य फर्म और प्रतिष्ठान होने की भी जानकारी मिली है। इसकी जांच चल रही है।
पार्सल से आती थीं दवाएं, जांच में कई कर्मचारी संदिग्ध

पार्सल से नकली दवाओं की खरीद-फरोख्त कर ठिकाने पर पहुंचाया जाता था। एसटीएफ की जांच में कुरियर कंपनी के कई कर्मचारी जांच के दायरे में आ गए हैं। इनसे कई से पूछताछ भी की गई है। ये ट्रेनों से दवाओं को मंगवाते थे और दूसरे राज्यों तक कालाबाजारी करते थे।
तीन मंजिला गोदाम में ठसाठस भरी दवाएं

दवा व्यापारी के यहां जब एसटीएफ-औषधि विभाग के टीम ने छापा मारा, तो उसने एक करोड़ रुपये की गड्डियों से भरा बैग रख दिया। क्योंकि वो जानता था कि यदि टीम ने उसके खेल पकड़ लिया, तो करोड़ों रुपये का नुकसान उसे झेलना पड़ेगा।
एसटीएफ निरीक्षक यतेंद्र शर्मा ने बताया कि नकली दवाओं के मामले की जांच में कुरियर कंपनी के कर्मचारियों की भी भूमिका संदिग्ध मिली है। जब्त की गई दवाओं को ये पार्सल के जरिये से मंगवाने के साथ कई राज्यों में खपाने का खेल करते थे। इसमें ये फर्जी फर्म का भी इस्तेमाल करते थे। ऐसे ही कुरियर कंपनी के एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है।
अभी जांच चल रही है। कुछ और लोग पकड़े जा सकते हैं। इसके लिए रेलवे स्टेशनों के पार्सल काउंटर की भी जांच की गई है। तमिलनाडु के चेन्नई और पुडुचेरी से भी पार्सल के जरिये से ही दवाओं को आगरा मंगवाकर कालाबाजारी की जा रही थी।
वर्ष 2022 में भी आया था कारोबारी का नाम
एसटीएफ के निरीक्षक यतेंद्र शर्मा ने बताया कि रकम पकड़े जाने की जानकारी पर आयकर विभाग की टीम ने भी जांच की। इसमें पता चला कि पकड़े गए कारोबारी का नाम वर्ष 2022 में भी सामने आया था। गुजरात में हवाला एजेंट पकड़े गए थे। तब आगरा में रकम भेजी गई थी।
एजेंटों के माध्यम से दवा कारोबारी को नोटिस जारी किया गया था। मगर जांच न होने की वजह से आगरा में चल रहे नेटवर्क का खुलासा नहीं हो सका था। अब एसटीएफ इसे पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुट गई है। हिमांशु अग्रवाल से पूछताछ में कई लोगों के नाम के बारे में पता चला है। उनकी धरपकड़ के लिए टीमें लगी हैं। आयकर विभाग की टीम ने अपने स्तर पर पूछताछ की है।
10 साल में अवैध कारोबार से खड़ा किया साम्राज्य
एसटीएफ की पूछताछ में पता चला है कि हिमांशु अग्रवाल ने फव्वारा बाजार में एक छोटी से दुकान से शुरुआत की थी। इसके बाद मोती कटरा में बड़ी दुकान और गोदाम बना लिया। सूत्रों से पता चला कि कमला नगर में आलीशान कोठी से लेकर जमीन भी खरीद ली।
नकली दवाओं का काला कारोबार, 11 राज्यों तक फैला है जाल
आगरा की नकली दवाओं की कालाबाजारी का जाल 11 राज्यों तक फैला हुआ है। यहां से नशे की दवाओं के अलावा सरकारी और एक्सपायर्ड दवाओं को री-पैकिंग कर भेजा जाता है। नशे के लिए तैयार हो रहे कफ सिरप की कालाबाजारी बांग्लादेश तक है। एसटीएफ, औषधि विभाग और एंटी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स ने बीते 10 साल में करीब 300 करोड़ रुपये की दवाएं जब्त कर कार्रवाई की है।
आगरा से उत्तर प्रदेश के कई जिलों के अलावा, हरियाणा, मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब, झारखंड, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश में दवाएं जब्त की गई हैं। इन राज्यों की टीम ने आगरा में कई बार गोदाम और मेडिकल एजेंसी पर छापा मारकर आरोपियों को पकड़ा। दवाओं के नमूने जांच में नकली भी मिले। यहां तक कि आगरा में नकली दवाओं की फैक्टरियां भी पकड़ी जा चुकी हैं। सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि इन सभी पर कार्रवाई की और कोर्ट में मामला चल रहा है। जांच में बीते दो साल में 40 दवाएं नकली मिल चुकी हैं।
दवा माफिया को पकड़ने के लिए सीबीआई जांच की मांग
जिला आगरा केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशु शर्मा का कहना है कि कुछ लोग नकली और नशे की दवाओं की कालाबाजारी कर रहे हैं, इससे सभी दवा व्यापारी बदनाम हो रहे हैं। प्रदेश सरकार से मांग है कि दवा माफिया को पकड़ने के लिए सीबीआई जांच की संस्तुति करें।
आगरा में हुईं सबसे बड़ी कार्रवाई
2025 : एनडीपीएस की टीम ने नुनिहाई में ऑटो से कालाबाजारी के लिए जा रहीं नशे की दवाओं को पकड़ा।
2025: ताजगंज में पप्पू और इदरीश के घर बने गोदाम में अवैध रूप से रखीं दवाएं बरामद कीं।
2024: शास्त्रीपुरम में जीजा-साले अश्वनी गुप्ता-सौरभ दुबे की पशुओं की नकली दवा बनाने की दो फैक्टरी पकड़ी।
2024: कमला नगर निवासी विजय गोयल की नकली दवा-सिरप बनाने की चार फैक्टरी पकड़ी।
2022 : कमला नगर के मोहित बंसल की हिमाचल प्रदेश के बद्दी में नकली दवा बनाने की फैक्टरी पकड़ी।
2021: आवास विकास कॉलोनी में धीरज राजौरा, प्रदीप राजौरा के नकली, एक्सपायर्ड दवाओं की री-पैकिंग की फैक्टरी पकड़ी।
2021: गढ़ी भदौरिया में राजन अग्रवाल की नकली सर्जिकल सामान बनाने की फैक्टरी पकड़ी।
2019: फ्रीगंज में दो गोदामों में दवाओं का भंडारण पकड़ा।
2018: कमला नगर निवासी पंकज गुप्ता का नकली और सरकारी दवाओं की कालाबाजारी का अंतरराज्यीय गैंग पकड़ा।
2016: कमला नगर निवासी कपिल अरोड़ा और जितेंद्र अरोड़ा की पंजाब एसटीएफ ने नशे के लिए दवाओं की कालाबाजारी पकड़ी।
2015: शास्त्रीपुरम स्थित निखिल होम्स में दो भाइयाें के दवाओं से भरे हुए गोदाम पकड़े।
इस तरह हुई कार्रवाई
– शुक्रवार दोपहर 12 बजे से कार्रवाई शुरू हुई।
– शुक्रवार शाम 6 बजे छह गोदामों पर टीम पहुंची।
– रात 10 बजे चार गोदाम और मेडिकल स्टोर सील किए।
– शनिवार की सुबह 11 बजे से मोती कटरा गोदाम पर छापा।
– रात 10 बजे हिमांशु अग्रवाल रिश्वत के लिए एक करोड़ रुपये के नकदी लेकर आया।
– रात 12 बजे हिमांशु अग्रवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
– रविवार सुबह 10 बजे से देर रात तक जांच और कार्रवाई जारी।

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