राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से पूजा स्थल कानून पर सुनवाई के दौरान धार्मिक स्थलों से संबंधित नए मुकदमे दायर करने पर रोक लगाए जाने के फैसले पर कहा है कि न्यायपालिकाओं में यह विषय चल रहे थे। न्यायपालिका पूरी तरह से स्वतंत्र है। वह भारतीय जीवन मूल्यों, संस्कृति और सर्व धर्म समभाव की रक्षक है। न्यायपालिका अपना फर्ज निभा रही है और आगे भी आएगी, यह उम्मीद की जाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी नया आदेश पारित करने से रोका
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया। इसमें कोर्ट ने फिलहाल देश भर की सभी अदालतों को मौजूदा धार्मिक संरचनाओं के खिलाफ लंबित मुकदमों में सर्वे के आदेश सहित कोई भी प्रभावी अंतरिम या अंतिम आदेश पारित करने से रोक दिया। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्र को हलफनामा दायर करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उपासना स्थल कानून फिर चर्चा में आ गया है। कई विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया है। वहीं याचिकाकर्ता और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने कहा है कि उपासना स्थल अधिनियम के तहत न्यायालय तक पहुंच अवरुद्ध कर दी गई है।








