देश के कई राज्यों में हो रही बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। खासकर ओडिशा, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। ओडिशा में गहरे दबाव के कारण हुई मूसलाधार बारिश से कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर पहुंच गई हैं, सैकड़ों गांव प्रभावित हुए हैं और करीब 14,500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। छत्तीसगढ़ में भी बारिश और बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए 26 सितंबर को पूरे राज्य के स्कूल बंद रखने का फैसला लिया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश में भारी बारिश, आंधी-वज्रपात और अचानक बाढ़ की आशंका को देखते हुए सरकार ने संवेदनशील जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
भारी बारिश का असर राज्य के 10 जिलों में सबसे ज्यादा देखने को मिला है। इनमें कोरापुट, मलकानगिरी, गंजाम, गजपति, कंधमाल, रायगड़ा, नबरंगपुर, कालाहांडी, नुआपाड़ा और बोलांगीर शामिल हैं। सरकार के मुताबिक राज्यभर में 857 गांव बारिश से जुड़ी घटनाओं से प्रभावित हुए हैं और 14,479 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। गजपति में सबसे ज्यादा 189 गांव प्रभावित हुए, जबकि गंजाम में 58 गांवों पर बारिश का असर पड़ा है। दूसरी ओर बालासोर की जलाका और बुधबलंगा तथा जाजपुर की बैतरणी और कानी नदियां खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। इससे एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
मलकानगिरी में हालात खासे मुश्किल रहे, जहां संवेदनशील इलाकों से 2,259 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। कुछ पुल टूटने से सड़क संपर्क प्रभावित हुआ और एनएच-326 पर पानी बहने के कारण सैकड़ों वाहन फंस गए। पोतेरू इलाके में कई घरों में पानी घुस गया। केंद्रापड़ा में हजारी छक के पास नवनिर्मित एनएच-53 का एक हिस्सा धंस गया। हादसे के समय वहां कोई वाहन खड़ा या चल नहीं रहा था। कंधमाल के कालिंगा घाट में भूस्खलन से करीब 200 मीटर लंबी गार्ड वॉल भी नीचे आ गई। खल्लिकोट के बड़ा घाटी में एनएच-16 पर बोल्डर गिरने से यातायात बाधित हुआ। गजपति के मोहना इलाके में कई सड़कें भूस्खलन से बंद हुईं, जबकि रायगड़ा में पेड़ गिरने और रेलवे ट्रैक पर भूस्खलन से ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं।
मौसम विभाग ने दी राहत की खबर
भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक ओडिशा में तबाही मचाने वाला गहरा दबाव अब कमजोर होकर डिप्रेशन में बदल गया है और राज्य से बाहर निकलकर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के दक्षिण-दक्षिण-पूर्व में पहुंच गया है। हालांकि खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मौसम केंद्र, भुवनेश्वर ने सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बरगढ़, संबलपुर, क्योंझर, मयूरभंज, नुआपाड़ा और नबरंगपुर समेत कई जिलों में शनिवार सुबह तक भारी बारिश का अनुमान जताया है। जल संसाधन विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ दिलीप कुमार राउत ने कहा कि कई नदियों का जलस्तर बढ़ा है और कुछ जगह खतरे के निशान के ऊपर भी है, लेकिन फिलहाल बड़ी बाढ़ की आशंका नहीं है क्योंकि बारिश की रफ्तार कम हुई है।
छत्तीसगढ़ में 26 सितंबर को सभी स्कूल बंद
ओडिशा के बाद छत्तीसगढ़ में भी लगातार बारिश ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने शनिवार, 26 सितंबर को सभी सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। लगातार बारिश से जलभराव, नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने तथा कई इलाकों में आवागमन प्रभावित होने की आशंका है। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से बच्चों को घर पर रखने, सतर्क रहने और जरूरत न होने पर यात्रा से बचने की अपील की है।
बस्तर में सबसे ज्यादा चिंता, बारिश ने बिगाड़ा संपर्क
छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में पिछले दो-तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। बस्तर संभाग में हालात ज्यादा चुनौतीपूर्ण बताए जा रहे हैं। शुक्रवार तड़के कोंडागांव जिले में बारिश से जुड़ी एक घटना में 40 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। शुक्रवार को दंतेवाड़ा, बीजापुर, कोंडागांव, कांकेर और बस्तर के साथ गरियाबंद, धमतरी और दुर्ग में भी स्कूल बंद रखे गए थे। राज्य में 1 जून से 25 सितंबर तक औसतन 1,082.4 मिलीमीटर बारिश हुई, जो 10 साल के मौसमी औसत 1,081.5 मिलीमीटर का 100.1 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में ही औसतन 52.8 मिलीमीटर बारिश हुई।
कहीं सामान्य से ज्यादा तो कहीं कम बारिश
छत्तीसगढ़ में बारिश का असर हर जिले में एक जैसा नहीं रहा। बलरामपुर में मौसमी औसत के मुकाबले 169.4 प्रतिशत बारिश दर्ज हुई, जबकि नारायणपुर में कुल 1,600.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। दूसरी तरफ सरगुजा में 606.6 मिलीमीटर, जशपुर में 828.7 मिलीमीटर, कबीरधाम में 672 मिलीमीटर, बेमेतरा में 597.1 मिलीमीटर और कांकेर में 1,110.7 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से कम है। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और बीजापुर में भी सामान्य के मुकाबले बारिश कम रही। बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोरबा, जांजगीर-चांपा, दुर्ग और राजनांदगांव में बारिश सामान्य के आसपास रही।
यूपी में रेड और ऑरेंज अलर्ट, स्कूलों पर भी नजर
उत्तर प्रदेश में भी मौसम को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। भारी बारिश, आंधी-वज्रपात और अचानक बाढ़ की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने और जरूरत के मुताबिक मौके पर जाने के निर्देश दिए हैं। रेड अलर्ट और अचानक बाढ़ की आशंका वाले जिलों में स्कूल बंद रखने को कहा गया है। लखीमपुर खीरी, सीतापुर, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। वहीं बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, संत कबीर नगर, महाराजगंज, रायबरेली, अयोध्या, बस्ती, लखनऊ, बाराबंकी, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल और बदायूं समेत कई इलाकों में ऑरेंज अलर्ट के मद्देनजर अधिकारी सक्रिय हैं।
उत्तर प्रदेश में आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, मऊ, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, अंबेडकर नगर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अयोध्या, गोंडा, श्रावस्ती, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी, अमेठी, फतेहपुर, कानपुर नगर, बांदा, कौशांबी और चित्रकूट के कुछ वाटरशेड इलाकों में अचानक बाढ़ की आशंका को देखते हुए राहत और सुरक्षा एजेंसियों को तैयार रखा गया है। अधिकारियों को बारिश और बिजली गिरने से हुए नुकसान का तत्काल आकलन कर प्रभावित परिवारों तक 24 घंटे के भीतर हरसंभव मदद पहुंचाने को कहा गया है। प्रशासन को निचले इलाकों, नदियों और नालों के आसपास लगातार निगरानी रखने तथा जरूरत पड़ने पर सुरक्षित आश्रय, भोजन, पीने का पानी और दवाइयां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से जलभराव वाले इलाकों, तेज बहाव वाली नदियों और नालों में बेवजह जाने से बचने की अपील की गई है।







