कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वोट चोरी के आरोपों को लेकर भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि मैं चुनाव आयोग और उनके अधिकारियों को साफ कह रहा हूं। आप जो कर रहे हो, गलत कर रहे हो। ये देश के खिलाफ है। ये मत भूलिए, जब टाइम आएगा हम आपको पकड़ेंगे बचने वाले नहीं हो। इसके साथ ही उन्होंने पोस्ट पर लिखा कि वोट की चोरी भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है। ये हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे अंजाम देने वाले भाजपा आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का काम किया है। इंसाफ जरूर होगा।
ओपी रावत ने फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर क्या कहा?
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि वैधानिक मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 में बदलाव करना गलत और गैरकानूनी है। रावत के मुताबिक, अगर फॉर्म में बदलाव करना है तो इसके लिए संबंधित नियमों में संशोधन की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। रिपोर्ट में बताया गया कि विवेक जोशी ने मई में फॉर्म-6 में एसआईआर से जुड़ी घोषणा जोड़ने पर आपत्ति जताई थी और इसे नियमों में बदलाव के बिना लागू करने पर सवाल उठाया था। बाद में संधू ने भी इस बदलाव को अनधिकृत और गैरकानूनी बताते हुए इसे तुरंत हटाने की बात कही थी।
मतदाता सूची के सॉफ्टवेयर को लेकर रावत ने क्या सवाल उठाया?
ओपी रावत ने मतदाता सूची के डेटाबेस और उसके सॉफ्टवेयर के नियंत्रण को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि किसी क्षेत्र के अधिकारी किसी मतदाता सूची में बदलाव को सही मानें, लेकिन सॉफ्टवेयर उन्हें उस बदलाव को दर्ज करने की अनुमति ही न दे। रावत ने कहा कि किसी एक स्तर पर सभी अधिकारों का केंद्रीकरण नहीं होना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता सूची के डेटाबेस के नियंत्रण में बदलाव को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन से भी संपर्क किया था। रावत ने कहा कि ऐसे घटनाक्रम से चुनाव आयोग पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
चुनाव आयोग ने मतभेद के आरोपों पर क्या कहा?
चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन घटनाक्रमों को औपचारिक असहमति के तौर पर स्वीकार नहीं किया है। आयोग का कहना है कि एसआईआर समेत उसके सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं। वहीं ओपी रावत ने कहा कि अगर दो चुनाव आयुक्तों ने किसी फैसले को लेकर लगातार आपत्तियां दर्ज कीं, तो यह गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि दोनों आयुक्तों को कुछ फैसले गलत लग रहे थे तो उन्होंने पहले ही इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की। इस तरह एक ओर राहुल गांधी और विपक्ष आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि आयोग अपने फैसलों को सर्वसम्मत बता रहा है।




