यमुना एक्सप्रेसवे पर चलती एसी स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्री जिंदा जल गए। 20 यात्री घायल हो गए। मृतकों में तीन पुरुष व तीन महिलाएं हैं। तीन की पहचान नहीं हुई है। हादसे में चालक की भारी लापरवाही सामने आई है। यात्रियों ने जलने की बदबू आने और आग लगी होने की शिकायत की थी, पर चालक हंसते हुए बीड़ी पीते रहे। धमकाते हुए कहा, मरना है तो मरो, बस नहीं रोकेंगे।
हादसे की शिकार बस बीआर32पीए8647 का 19 बार चालान के साथ 1.75 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। बस का संचालन मप्र की राज कल्पना ट्रैवल एजेंसी करती है, जबकि पंजीकरण बिहार के मधुबनी में है। फिटनेस राजस्थान से, प्रदूषण प्रमाणपत्र हरियाणा से जारी हुआ है। इसके वास्तविक संचालक का अभी तक पता नहीं चला है। अलग-अलग राज्यों में दस्तावेज किस आधार पर जारी किए गए, इसकी जांच की जा रही है।
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- आग बस में धुआं भर गया। आपात गेट जाम होने की वजह से बस से निकलने का एक ही रास्ता था। ऐसे में यात्री अंदर फंस गए। धुएं से दम घुटने लगा और वे बेेहोश होते गए।
- पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम योगी ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख की मदद की घोषणा की है।
जले हुए शवों की डीएनए जांच से होगी शिनाख्त
बस में आग लगने के बाद जले शवों की पहचान पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। हादसे में कई शव 90 फीसदी से अधिक जल चुके हैं। उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। यात्रियों के पास मौजूद पहचान संबंधी दस्तावेज भी नष्ट हो जाने से छह शवों की पहचान नहीं हो पाई है। अब पुलिस की ओर से शवों की शिनाख्त कराने के लिए डीएनए जांच कराई जाएगी। बस संचालक से आरक्षण का पूरा रिकॉर्ड भी लिया जा रहा है। मृतकों के पास मिले मोबाइल फोन, सिम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी पहचान में मदद ली जा रही हैं। इसी तरह कपड़े, जूते, आभूषण, घड़ी और अन्य व्यक्तिगत सामान के आधार पर परिजन पहचान कराई जा रही है।
हादसे की सूचना पर तुरंत पुलिस मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। हादसे में नौ लोगों की मौत हुई है। मामले में प्राथमिकी दर्ज कर चालक और परिचालक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
– रवि शंकर निम, डीसीपी ग्रेटर नोएडा जोन








