उत्तराखंड: प्रदेश में बिना मान्यता चल रहे 72 और मदरसे बंद,2 महीने में आधों में लटक गए ताले

त्तराखंड में बिना मान्यता चल रहे करीब आधे मदरसों पर ताले लटक गए हैं। 107 मदरसों के बाद अब 72 और मदरसे बंद हो गए हैं। शासन की एक रिपोर्ट के मुताबिक 19 मदरसे सील किए जा चुके हैं। वहीं, 54 मदरसों ने मान्यता लेना तो दूर अभी इसके लिए शिक्षा विभाग में आवेदन तक नहीं किया। स्थायी प्रशासन की ओर से इन मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है।

प्रदेश सरकार ने मदरसा शिक्षा को आधुनिक और समान शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के लिए राज्य में दो महीने पहले मदरसा बोर्ड खत्म कर राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को लागू किया था। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इसके पीछे सरकार की मंशा मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है ताकि बच्चे आगे उच्च शिक्षा और रोजगार के समान अवसर हासिल कर सकें, लेकिन राज्य में कई मदरसे मानकों को ताक पर रखकर एक या दो कमरों में चल रहे हैं। इन मदरसों में से कई ने मान्यता के लिए आवेदन तक नहीं किया। कुछ ऐसे भी हैं जो स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई से बचने के लिए आवेदन तो कर चुके हैं लेकिन मानकों को पूरा नहीं कर रहे।

 

प्रदेश में अब तक 179 मदरसे हुए बंद और बढ़ेगी संख्या
राज्य में कुल 452 मदरसों में से अब तक 179 मदरसे बंद हो चुके हैं। अगले कुछ दिनों में इनकी संख्या और बढ़ सकती है। जबकि 19 मदरसे सील किए गए हैं। वहीं, 54 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक बंद मदरसों में हरिद्वार में 102, ऊधमसिंह नगर में 55, देहरादून में 12 व नैनीताल में 10 मदरसे हैं।

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452 में से अब तक मात्र 33 मदरसों ने ली मान्यता
प्रदेश में 452 मदरसों में से अब तक मात्र 33 मदरसों ने शिक्षा विभाग से मान्यता ली है। जबकि 134 ने इसके लिए आवेदन किया है। इसमें सबसे अधिक 76 हरिद्वार जिले के हैं। इसके अलावा आठ देहरादून, 48 ऊधमसिंह नगर, दो नैनीताल जिले के हैं। शिक्षा विभाग इनमें से कुछ के आवेदन मानक पूरे न होने से रद्द कर चुका है।

बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने की चुनौती
प्रदेश में बिना मान्यता चल रहे मदरसों के बंद होने के बाद सरकार के सामने इन संस्थानों में पढ़ रहे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की चुनौती है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कोई बच्चा मुख्यधारा की शिक्षा से वंचित न रहे इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी।

मदरसा बोर्ड को खत्म कर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का फैसला किसी समुदाय की पहचान या परंपरा को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि सभी वर्गों के बच्चों को बेहतर और समान शैक्षणिक अवसर देने के उद्देश्य से लिया गया है। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बिना मान्यता चल रहे मदरसों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
-डॉ.पराग मधुकर धकाते, विशेष सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण

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