9/11 आतंकी हमले की बरसी: ट्विन टावर से वॉर ऑन टेरर तक, अमेरिका को मिले जख्म और साजिशों की 25 साल पुरानी कहानी?

9/11 हमलों को 25 साल पूरे हो गए हैं। 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकी हमलों में 2977 लोगों की जान गई थी। चार विमानों को हाईजैक किया गया, जिनमें से दो न्यूयॉर्क के ट्विन टावर से टकराए, तीसरा अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन से जा टकराया और चौथा विमान पेनसिल्वेनिया में जा गिरा। अमेरिकी जांच के मुताबिक इन हमलों को अल-कायदा के 19 आतंकियों ने अंजाम दिया था।

हमले के बाद से ही एक सवाल लगातार बना रहा कि इतनी बड़ी साजिश की भनक पहले क्यों नहीं लगी? खुफिया एजेंसियों के पास मौजूद सूचनाओं पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी? इसी के साथ कई ऐसी साजिशी थ्योरी भी सामने आईं, जिनमें अमेरिकी सरकार से लेकर इस्राइल तक की कथित भूमिका के दावे किए गए, लेकिन इन दावों को स्थापित करने वाला विश्वसनीय सबूत सामने नहीं आया।

9/11 को आखिर हुआ क्या था और कितनी बड़ी थी तबाही?

    • अमेरिका में उस दिन सुबह 19 आतंकियों ने चार व्यावसायिक विमानों को हाईजैक किया। दो विमानों को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के नॉर्थ और साउथ टावर से टकराया गया। तीसरा विमान पेंटागन से टकराया।  चौथे विमान के यात्रियों ने आतंकियों का मुकाबला करने की कोशिश की और विमान पेनसिल्वेनिया के शैंक्सविले के पास एक खेत में गिर गया।
  • 9/11 मेमोरियल के अनुसार इस हमले में 90 देशों के 2977 लोग मारे गए। खरबों डॉलर की संपत्ति का नुकसान हुआ। एफबीआई के मुताबिक चारों विमानों को हाईजैक करने वाले 19 लोग अल-कायदा से प्रशिक्षित थे। उनमें 15 सऊदी अरब, दो संयुक्त अरब अमीरात, एक मिस्र और एक लेबनान से थे।

किसने कराया था हमला और कब मारा गया मास्टरमाइंड?

हमले के बाद अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इसे अल-कायदा से जोड़ने वाले सबूत जुटाए। एफबीआई के अनुसार ओसामा बिन लादेन और अल-कायदा 9/11 की साजिश के पीछे थे। लादेन ने बाद में हमले की योजना बनाने में अपनी भूमिका स्वीकार की। इसके बाद अमेरिका अलग ही मोड में आ गया। अमेरिका ने अफगानिस्तान में अल-कायदा और उसे पनाह देने वाले तालिबान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। हालांकि ओसामा बिन लादेन करीब एक दशक तक अमेरिका की पकड़ से बाहर रहा। आखिरकार 2 मई 2011 को पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी विशेष बलों ने अभियान चलाकर उसे मार गिराया। यानी हमले के मास्टरमाइंड तक पहुंचने में अमेरिका को करीब 10 साल लग गए।

क्या अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास हमले की चेतावनी थी?

  • ये 9/11 के सबसे गंभीर सवालों में से एक है। हमले के तुरंत बाद से ही दुनिया की सबसे शक्तिशाली मानी जाने वाली अमेरिकी खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों पर गंभीर सवाल उठने लगे थे। अमेरिका के आधिकारिक 9/11 जांच आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक खुफिया तंत्र को कई तरह के इनपुट पहले से मिल रहे थे, लेकिन अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल की घोर कमी थी। सीआईए और एफबीआई जैसी प्रमुख जांच एजेंसियां आपस में इन गुप्त सूचनाओं को समय रहते साझा नहीं कर पाईं।
  • कहा जाता है अगर इन सूचनाओं पर सही समय पर कार्रवाई की जाती, तो इतना बड़ा आतंकी हमला टाला जा सकता था। सूचनाओं की यह भारी अनदेखी सुरक्षा इतिहास का एक स्कैंडलस चैप्टर बनकर रह गई। जनवरी से 10 सितंबर 2001 तक राष्ट्रपति के दैनिक खुफिया ब्रीफ में बिन लादेन से जुड़ी 40 से ज्यादा रिपोर्ट थीं। 30 जून को एक रिपोर्ट में बिन लादेन की ओर से बड़े हमलों की योजना की चेतावनी दी गई थी। जुलाई और अगस्त में भी हमले के खतरे को लेकर कई अलर्ट जारी किया गया था।
और पढ़े  PM मोदी की तीन घंटे की क्लास: राज्यमंत्रियों पर सवालों की बौछार, पूछा- विकसित भारत के लिए खुद क्या किया?

क्या 6 अगस्त 2001 की खुफिया रिपोर्ट सबसे बड़ा संकेत थी?

6 अगस्त 2001 को तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को एक राष्ट्रपति दैनिक खुफिया ब्रीफ दी गई। इसका शीर्षक था, ‘बिन लादेन अमेरिका पर हमला करने के लिए तैया है’। इसमें अमेरिका के भीतर हमले की संभावना का उल्लेख था। रिपोर्ट में एफबीआई की करीब 70 बिन लादेन से जुड़ी जांचों का भी जिक्र था। हालांकि इस चेतावनी के बाद राष्ट्रपति और उनके शीर्ष सलाहकारों के बीच 11 सितंबर से पहले अमेरिका पर अल-कायदा के हमले की संभावना को लेकर कोई अलग राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक नहीं हुई। यही वजह है कि बाद में खुफिया तंत्र की तैयारी और चेतावनियों पर कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठे।

हमले को क्यों नाकाम नहीं कर पाईं खुफिया एजेंसियां?

अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व अधिकारी जॉन किरियाको जैसे कई मुखर व्हिसलब्लोअर्स और जानकारों ने बाद के वर्षों में आतंकवाद विरोधी अभियानों और जांच के तरीकों को लेकर बड़े खुलासे किए। जॉन किरियाको ने अमेरिकी सरकार द्वारा चलाए गए गुप्त पूछताछ कार्यक्रमों और खुफिया विफलताओं पर खुलकर बात की। कई जानकारों ने सवाल उठाया कि हमले से पहले संदिग्ध आतंकियों की गतिविधियों पर पर्याप्त नजर क्यों नहीं रखी गई थी। ऐसे अंदरूनी बयानों और खुलासों ने इस धारणा को बल दिया कि व्यवस्था के भीतर कहीं न कहीं बहुत बड़ी लापरवाही या तथ्यों को छिपाने की कोशिश की गई थी।

9/11 के बाद वॉर ऑन टेरर कैसे शुरू हुआ?

हमले के बाद अमेरिका ने इसे सिर्फ घरेलू सुरक्षा का मामला नहीं माना, बल्कि वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ युद्ध शुरू किया। 7 अक्तूबर 2001 को अमेरिका और ब्रिटेन ने अफगानिस्तान में तालिबान के सैन्य ठिकानों और अल-कायदा के प्रशिक्षण शिविरों पर हमला शुरू किया। अमेरिका का आरोप था कि तालिबान ने बिन लादेन और अल-कायदा को सुरक्षित ठिकाना दिया था। अभियान में कई देशों ने अमेरिका का साथ दिया। इस तरह 9/11 के कुछ ही हफ्तों में वॉर ऑन टेरर अमेरिकी विदेश और सुरक्षा नीति का केंद्रीय हिस्सा बन गया।

क्या यह जंग सिर्फ अफगानिस्तान तक सीमित रही?

नहीं… 9/11 के बाद अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ अभियान को दुनिया के कई हिस्सों तक फैलाया। अफगानिस्तान के बाद इराक भी अमेरिकी रणनीति का हिस्सा बना। हालांकि इराक पर 2003 का अमेरिकी सैन्य अभियान 9/11 के सीधे हमलावरों के खिलाफ अभियान से अलग था। उस समय जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन ने इराक के तत्कालीन शासन और कथित सामूहिक विनाश के हथियारों को लेकर अलग तर्क दिए। बाद में इराक युद्ध अमेरिकी विदेश नीति और 9/11 के बाद शुरू हुए व्यापक वॉर ऑन टेरर पर बहस का बड़ा हिस्सा बन गया।

और पढ़े  ब्रिक्स समिट LIVE: रूसी राष्ट्रपति पुतिन शिष्टमंडल के साथ दिल्ली पहुंचे, ब्राजील समेत कई देशों के मेहमान भी आए

ट्विन टावर पर हुए हमले पर क्या दावा किया गया?

  • ट्विन टावर के गिरने के बाद कुछ समूहों ने दावा किया कि विमान की टक्कर और आग से इमारतें नहीं गिर सकती थीं और उनमें पहले से विस्फोटक लगाए गए होंगे।
  • इस थ्योरी में ‘कंट्रोल्ड डिमोलिशन’ का दावा किया गया। इसके अलावा कुछ लोगों ने थर्माइट जैसे पदार्थ के इस्तेमाल की बात भी कही।
  • हालांकि अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड टेक्नोलॉजी यानी एनआईएसटी ने विस्तृत जांच के बाद कहा कि उसे नियंत्रित विध्वंस के समर्थन में कोई पुष्ट प्रमाण नहीं मिला।
  • इसके मुताबिक विमानों की टक्कर और उसके बाद लगी भीषण आग से संरचना कमजोर हुई और वहीं से गिरने की प्रक्रिया शुरू हुई।

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर-7 को लेकर पुल इट वाला दावा क्या है?

9/11 की साजिशी थ्योरी में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर-7 की इमारत का गिरना भी बड़ा मुद्दा रहा। इस इमारत को विमानों ने सीधे नहीं टकराया था, फिर भी यह उसी दिन गिर गई। इसके बाद इमारत के मालिक लैरी सिल्वरस्टीन के एक पुराने इंटरव्यू में बोले गए पुल इट शब्द को लेकर दावा किया गया कि उन्होंने इमारत को गिराने का आदेश देने की बात कही थी। हालांकि सिल्वरस्टीन के प्रवक्ता ने बाद में स्पष्ट किया कि इसका मतलब इमारत में मौजूद दमकलकर्मियों को बाहर निकालना था, न कि विस्फोटक से इमारत गिराना। एनआईएसटी ने अपनी जांच में कहा कि डब्ल्यूटीसी-7 आग के कारण ढही और नियंत्रित विध्वंस के समर्थन में कोई पुष्ट प्रमाण नहीं मिला।

क्या पेंटागन पर विमान नहीं, मिसाइल गिरने का भी दावा हुआ?

हां… थियरी मेइसां सहित कुछ साजिशी सिद्धांतों में दावा किया गया कि अमेरिकन एयरलाइंस फ्लाइट-77 पेंटागन से नहीं टकराई और वहां किसी मिसाइल या दूसरे हथियार का इस्तेमाल किया गया। इस दावे का आधार मुख्य रूप से पेंटागन की क्षति और शुरुआती तस्वीरों की अलग-अलग व्याख्या थी। लेकिन आधिकारिक जांच में फ्लाइट-77 के पेंटागन से टकराने की बात कही गई।
एनआईएसटी ने भी कहा कि उसे मिसाइल के टकराने का कोई सबूत नहीं मिला।

इस्राइल की कथित भूमिका को लेकर क्या-क्या दावे किए गए?

  • 9/11 के बाद इंटरनेट और कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस्राइल तथा उसकी खुफिया एजेंसी मोसाद की कथित भूमिका से जुड़े कई दावे सामने आए।
  • सबसे ज्यादा चर्चित दावा यह था कि हजारों यहूदी या इस्राइली नागरिकों को हमले की पहले से जानकारी थी और उन्हें वर्ल्ड ट्रेड सेंटर जाने से बचने को कहा गया था।
  • एक दूसरा दावा उन पांच इस्राइली नागरिकों से जुड़ा था, जिन्हें 11 सितंबर के दिन न्यू जर्सी में संदिग्ध व्यवहार के बाद हिरासत में लिया गया था।
  • इन घटनाओं को कुछ लोगों ने मोसाद से जोड़ने की कोशिश की। लेकिन इन दावों को 9/11 हमलों में इस्राइल की संलिप्तता का विश्वसनीय प्रमाण नहीं माना गया।
और पढ़े  नेपाल में फिर कांपी धरती- तिब्बत में भी महसूस किए गए झटके, रिक्टर स्केल में 5.0 रही तीव्रता, कहां था केंद्र?

क्या 4000 यहूदियों को पहले से पता था हमला होने वाला है?

यह दावा 9/11 के शुरुआती दिनों में तेजी से फैला था। इसमें कहा गया कि वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में काम करने वाले 4,000 यहूदी उस दिन काम पर नहीं पहुंचे क्योंकि उन्हें पहले से हमले की जानकारी थी। बाद की जांच में इस दावे का कोई आधार नहीं मिला। अमेरिकी विदेश विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती खबर में करीब 4000 इस्राइलियों के न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन क्षेत्र में मौजूद होने की संभावित सूची का जिक्र था। इसी संख्या को बाद में बदलकर यह झूठा दावा बनाया गया कि 4,000 यहूदियों को हमले की पहले से जानकारी थी और उन्होंने काम पर जाना छोड़ दिया। वास्तव में 9/11 में यहूदी लोग भी मारे गए थे।

न्यू जर्सी में पकड़े गए पांच इस्राइलियों को लेकर क्या सवाल उठे?

हमले के दिन न्यू जर्सी में पांच इस्राइली नागरिकों को हिरासत में लिया गया था। कुछ गवाहों ने उन्हें हमले के बाद तस्वीरें और वीडियो बनाते देखा था। बाद में इस घटना को ‘डांसिंग इस्राइलिस’ नाम से इंटरनेट पर प्रचारित किया गया और इसे मोसाद से जोड़ने वाले दावे किए गए। हालांकि किसी जांच ने यह पता नहीं चल सका कि इन लोगों ने 9/11 हमले की योजना बनाई या उन्हें हमले की पहले से जानकारी थी। इसी तरह इन पांच लोगों की गिरफ्तारी को सीधे अल-कायदा की साजिश से जोड़ने वाला प्रमाण भी सामने नहीं आया।

क्या सऊदी अरब या किसी दूसरी सरकार के हाथ सामने आया?

9/11 की फंडिंग को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। 9/11 आयोग ने जांच में पाया कि हमले की साजिश पर करीब 4 लाख से 5 लाख डॉलर खर्च हुए और उपलब्ध सबूत 19 हमलावरों को अल-कायदा की ओर से मिले पैसे से जोड़ते हैं। आयोग ने कहा कि उसे किसी विदेशी सरकार या विदेशी सरकारी अधिकारी की ओर से हमलावरों को फंडिंग दिए जाने का विश्वसनीय प्रमाण नहीं मिला। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सऊदी अरब अल-कायदा के लिए फंड जुटाने का महत्वपूर्ण क्षेत्र था, लेकिन सऊदी सरकार या उसके वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से संगठन को फंड देने का सबूत नहीं मिला।

  • Related Posts

    ब्रिक्स समिट LIVE: रूसी राष्ट्रपति पुतिन शिष्टमंडल के साथ दिल्ली पहुंचे, ब्राजील समेत कई देशों के मेहमान भी आए

    रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ब्रिक्स देशों की शिखर बैठक के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत अन्य सदस्य देशों के मेहमान भी आज राष्ट्रीय…

    सोनीपत: 2 करोड़ की रंगदारी के बाद कार्यालय पर बरसाई गोलियां, पीछा करते हुए पुलिस की बदमाशों से मुठभेड़

    नंदू गैंगस्टर के नाम पर दो करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और रकम नहीं देने पर जान से मारने की धमकी देने के बाद खांडा रोड स्थित कार्यालय पर फायरिंग…