डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इस सप्ताह एक और बैंक पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। इसका मकसद ईरान से होने वाले लेनदेन पर रोक लगाना है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रविवार को यह जानकारी दी।
बेसेंट ने कहा, अगर जरूरत पड़ी तो यह वित्तीय हमला होगा। उन्होंने कहा, हम लोगों को दिखा रहे हैं कि हमें पता है आप कौन हैं। आपको भी पता है कि आप कौन हैं। इसे बंद करना होगा।
उन्होंने हाल में एक नया अभियान शुरू करने की घोषणा की थी। इसका मकसद उन देशों पर दबाव बनाना है, जो पहले से कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहे ईरान के साथ अब भी कारोबार कर रहे हैं। अमेरिका चाहता है कि ये देश ईरान से अपने वित्तीय संबंध तोड़ लें। ऐसा नहीं करने पर उन्हें अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
इस अभियान में अमेरिकी वित्त मंत्रालय की पहली आधिकारिक कार्रवाई शुक्रवार को सामने आई। मंत्रालय ने एक प्रस्तावित नियम जारी किया। इसे अंतिम रूप दिए जाने पर मिस्र के दूसरे सबसे बड़े बैंक ‘बैंके मिस्र’ की संयुक्त अरब अमीरात स्थित शाखाओं की अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच खत्म हो जाएगी।
चीन और भारत पर भी नजर क्यों?
अमेरिका ने मिस्र के इस बैंक पर सीधे प्रतिबंध लगाने से फिलहाल परहेज किया है। इससे संकेत मिलता है कि रिपब्लिकन प्रशासन उन बड़े व्यापारिक साझेदारों पर कार्रवाई करने से बचना चाहता है, जो ईरान के साथ कारोबार करते हैं। इनमें चीन और भारत भी शामिल हैं। बेसेंट की इस सप्ताह दोनों देशों के अधिकारियों से मुलाकात होनी है।
बेसेंट ने एपी से कहा कि वह जी-20 बैठक में चीन के अपने समकक्षों से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि बीजिंग पर प्रतिबंध लगाने के मामले में ‘सभी विकल्प खुले हैं’। चीन लगातार ईरान से खरीदारी कर रहा है।
हालांकि, बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर कार्रवाई करने से हिचक नहीं रहा है। उन्होंने मीडिया में चल रही ऐसी खबरों को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिका इस बात पर सहमत हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना जरूरी है। दोनों देश इस बात पर भी सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना जरूरी है।








