उत्तर तोताद्रिमठ में श्रद्धांजलि सभा, संतों ने पुष्प अर्पित कर किया नमन; पीठाधीश्वर स्वामी अनंताचार्य बोले—गुरुदेव के उपदेश और आशीर्वाद आज भी हमारा मार्गदर्शन कर रहे
रामनगरी की समृद्ध संत परंपरा में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले उत्तर तोताद्रिमठ के पूर्वाचार्य जगद्गुरु स्वामी कमलाकांताचार्य की 12वीं पुण्यतिथि रविवार को श्रद्धा, भक्ति और भावुक स्मृतियों के बीच मनाई गई। मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में संत-महंतों और श्रद्धालुओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। इस दौरान संतों ने उनके आध्यात्मिक जीवन, कृतित्व, व्यक्तित्व और रामानुज संप्रदाय के प्रति उनके योगदान को याद किया।
सभा में वर्तमान पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी अनंताचार्य ने कहा कि गुरुदेव भले ही सशरीर आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी दिव्य स्मृतियां, उपदेश और आशीर्वाद आज भी शिष्यों एवं संत समाज के हृदय में उसी तरह जीवंत हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी कमलाकांताचार्य रामनगरी की संत परंपरा के ऐसे संत थे, जिन्होंने अपने आचरण और आध्यात्मिक साधना से अनेक लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि संतों का शरीर नश्वर है, लेकिन उनके संस्कार, विचार और स्थापित परंपराएं सदैव जीवित रहती हैं। गुरुदेव द्वारा स्थापित धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। उनके आदर्शों को आगे बढ़ाना ही उनके जीवन की साधना को सार्थक करने का माध्यम है।
“गुरु के चरणों की धूल भी शिष्य के लिए मार्गदर्शन बन जाती है”—इस भाव के साथ संतों ने स्वामी कमलाकांताचार्य के जीवन को स्मरण करते हुए कहा कि उनका सानिध्य पाने वाले श्रद्धालुओं के लिए उनकी स्मृतियां आज भी अमूल्य धरोहर हैं।
संतों का हुआ सम्मान
मठ के उत्तराधिकारी एवं मैनेजिंग ट्रस्टी स्वामी केशव प्रपन्नाचार्य ने उपस्थित संत-महंतों का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि संत समाज की सबसे बड़ी पूंजी उनकी तपस्या और परंपरा होती है। पूर्वाचार्य स्वामी कमलाकांताचार्य ने जिस आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाया, उसे अक्षुण्ण रखना सभी की जिम्मेदारी है।
श्रद्धांजलि सभा में सतना, मध्य प्रदेश के स्वामी धरणीधराचार्य सहित विभिन्न स्थानों से पहुंचे संत-महंत और श्रद्धालु शामिल हुए। सभी ने स्वामी कमलाकांताचार्य के चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
मंदिर परिसर में पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा। संतों ने कहा कि “संत देह से विदा होते हैं, लेकिन उनके विचार युगों तक समाज का मार्गदर्शन करते हैं।” स्वामी कमलाकांताचार्य की पुण्यतिथि पर यही भाव पूरे श्रद्धांजलि समारोह में प्रमुखता से दिखाई दिया।








