राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा इन दिनों चर्चा में हैं। उन्हें लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत को तीन पत्र लिखे हैं। इनमें जस्टिस शर्मा के कामकाज पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जस्टिस मेहता ने उन्हें हटाने और राजस्थान हाईकोर्ट में किसी दूसरे हाईकोर्ट से नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की मांग की है।
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा का परिचय
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा नवंबर 2016 में राजस्थान हाईकोर्ट के जज बने। जनवरी 2022 में उनका तबादला पटना हाईकोर्ट किया गया। बाद में वे पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट भी भेजे गए। मई 2025 में कॉलेजियम ने उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट वापस भेजने की सिफारिश की। सितंबर 2025 से वे राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश हैं। न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, वे 26 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
जस्टिस संदीप मेहता का परिचय
जस्टिस संदीप मेहता राजस्थान हाईकोर्ट के जज रह चुके हैं। उन्हें 30 मई 2011 को अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया था। 6 फरवरी 2013 को वे स्थायी जज बने। फरवरी 2023 में उन्होंने गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली। नवंबर 2023 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया।
जज को हटाने का कोई मामला हाल में आया है?
जज को हटाने की प्रक्रिया का ताजा उदहारण जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले से समझा जा सकता है। मार्च 2025 में जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास के स्टोर रूम में आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में जली हुई नकदी मिलने का मामला सामने आया। इसके बाद तत्कालीन सीजेआई ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई।
समिति ने जांच के बाद 3 मई 2025 को रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद संसद में उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई। 12 अगस्त 2025 को लोकसभा अध्यक्ष ने हटाने का मोशन स्वीकार किया, लेकिन संसद में प्रक्रिया पूरी होने से पहले जस्टिस यशवंत वर्मा ने 9 अप्रैल 2026 को राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा दे दिया। इसलिए उन्हें संसद की महाभियोग प्रक्रिया के जरिए पद से नहीं हटाया गया।
इसके बाद भी उनके खिलाफ संसदीय जांच समिति ने अपनी जांच जारी रखी। समिति ने बाद में तीनों आरोपों को साबित माना। इनमें सरकारी आवास में बेहिसाब नकदी की मौजूदगी, घटनास्थल और सबूतों से जुड़े मामले और जांच के दौरान दिए गए उनके जवाब से जुड़े आरोप शामिल थे।
अब तक कितने जजों को हटाया गया?
भारत में अब तक किसी भी सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज को संसद की महाभियोग प्रक्रिया पूरी करके पद से नहीं हटाया गया है। यानी आंकड़ा शून्य है। हालांकि, कई जजों के खिलाफ हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई। कुछ मामलों में संसद में प्रस्ताव आगे बढ़ा, लेकिन जरूरी बहुमत नहीं मिल सका, जबकि कुछ जजों ने संसद की प्रक्रिया पूरी होने से पहले इस्तीफा दे दिया।
कुछ प्रमुख मामले:
- जस्टिस वी. रामास्वामी: 1993 में लोकसभा में हटाने का प्रस्ताव जरूरी बहुमत हासिल नहीं कर सका।
- जस्टिस सौमित्र सेन: 2011 में राज्यसभा ने प्रस्ताव पास किया, लेकिन लोकसभा में मतदान से पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
- जस्टिस पीडी दिनाकरन: 2011 में महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
- जस्टिस एसके गंगेले: उनके खिलाफ 2015 में राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन 2017 में जांच समिति ने आरोप सिद्ध नहीं माने।






