हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में विभिन्न विकास परियोजनाओं और योजनाओं के वित्तपोषण के लिए खुले बाजार से 700 करोड़ रुपये का ऋण जुटाने का निर्णय लिया है। राज्य के वित्त विभाग ने इस संबंध में एक अधिसूचना जारी कर दी है। यह राशि प्रदेश में सड़क, पुल, भवन, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के साथ-साथ स्वीकृत विकास योजनाओं पर खर्च की जाएगी।
हालांकि, इस नई उधारी के साथ हिमाचल प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ भी बढ़ने की आशंका है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक हिमाचल प्रदेश की कुल देनदारियां और बकाया ऋण 1.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुके हैं। इस आंकड़े में बाजार से लिए गए ऋण, केंद्र सरकार से प्राप्त कर्ज, सार्वजनिक खाते की देनदारियां और अन्य वित्तीय दायित्व शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी राज्यों में सीमित संसाधनों और अधिक विकास लागत के कारण उधारी पर निर्भरता अपेक्षाकृत अधिक रहती है।
वित्तीय जानकारों के अनुसार, यदि ऋण की राशि का उपयोग सड़क, पुल, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण में किया जाए, तो यह भविष्य में राज्य की आय बढ़ाने में सहायक हो सकता है। दूसरी ओर, लगातार बढ़ता कर्ज सरकार के ब्याज भुगतान और वित्तीय प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव भी डालता है। ऐसे में, सरकार के सामने विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 700 करोड़ रुपये की इस उधारी की पूरी प्रक्रिया आरबीआई के माध्यम से निर्धारित नियमों के तहत ही पूरी की जाएगी। इसके बाद जुटाई गई राशि का उपयोग विभिन्न विभागों की स्वीकृत विकास परियोजनाओं और आधारभूत ढांचा निर्माण कार्यों में किया जाएगा।







