चमोली- वसुधारा ट्रैक की सफाई का जिम्मा संभालेगी माणा की ईडीसी, बुग्यालों को प्लास्टिक कचरे से बचाने की पहल

Spread the love

देश के प्रथम गांव माणा से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल वसुधारा ट्रैक पर अब साफ-सफाई और संरक्षण की जिम्मेदारी माणा गांव की इको डेवलपमेंट कमेटी (ईडीसी) संभालेगी।

नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन ने वन पंचायत माणा के अधीन आने वाले इस क्षेत्र में बढ़ते प्लास्टिक कचरे और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए ईडीसी के गठन का निर्णय लिया है। इस पहल से जहां ट्रैक पर स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी, वहीं स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

चारधाम यात्रा के दौरान हर वर्ष लाखों श्रद्धालु वसुधारा जलप्रपात देखने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन ट्रैक पर पर्याप्त सफाई व्यवस्था न होने से प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के रैपर और अन्य कचरा जगह-जगह बिखरा रहता है। तेज हवा के कारण यह कचरा आसपास के बुग्यालों तक फैल जाता है, जिससे हिमालयी जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

 

साफ-सफाई के लिए माणा गांव की ईडीसी गठित की जाएगी।
वसुधारा पहुंचे तमिलनाडु की श्रद्धालु नंदिनी और बीकानेर के कमल स्वामी ने कहा कि इतने पवित्र और प्राकृतिक स्थल पर प्लास्टिक कचरे का बिखरा होना चिंता का विषय है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इसका दुष्प्रभाव बुग्यालों की नाजुक पारिस्थितिकी पर पड़ेगा।
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के प्रभागीय वनाधिकारी अभिमन्यु ने बताया कि वसुधारा ट्रैक के संरक्षण और नियमित साफ-सफाई के लिए माणा गांव की ईडीसी गठित की जाएगी। स्थानीय समुदाय की भागीदारी से न केवल प्लास्टिक कचरे पर प्रभावी नियंत्रण होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराते हुए इस महत्वपूर्ण हिमालयी ट्रैक को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।
 

और पढ़े  बदरीनाथ धाम में चढ़ावा हेराफेरी - चढ़ावा हेराफेरी के आरोपियों की संपत्ति खंगालेगी पुलिस, गणना कक्ष में बढ़ाई गई सुरक्षा

पांडव पुत्र सहदेव ने त्यागे थे प्राण

समुद्र तल से लगभग 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित वसुधारा जलप्रपात अपनी करीब 400 फीट ऊंची जलधारा, मनमोहक प्राकृतिक छटा और धार्मिक मान्यताओं के कारण देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। ऐसी मान्यता है कि इसी वसुधारा क्षेत्र के पास ही पांडव पुत्र सहदेव ने अपने प्राण त्यागे थे।


Spread the love
  • Related Posts

    उत्तराखंड: चारधाम यात्रा रुकी, मालदेवता में रिकॉर्ड बारिश दर्ज, हाईवे बंद, कई जगह बाढ़ जैसे हालात

    Spread the love

    Spread the loveराजधानी देहारदून में पिछले 24 घंटे में मालदेवता में सबसे अधिक 233 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि देहरादून, मसूरी, जोलीग्रांट और उखीमठ समेत कई क्षेत्रों में मूसलाधार…


    Spread the love

    उत्तराखंड: आज भी पहाड़ से मैदान तक भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट; 111 मार्ग बंद

    Spread the love

    Spread the loveउत्तराखंड में दूसरे दिन भी भारी बारिश की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से राज्य के अधिकांश जिलों में भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तेज…


    Spread the love