नीट यूजी 2026 के पेपर लीक ने देश की परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। छात्रों के विरोध प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग के बीच केंद्र सरकार ने अब कानून को और सख्त बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी कड़ी में लोकसभा में संशोधन विधेयक पेश किया गया।
कानून बनने के बाद किन परीक्षाओं पर लागू होगा नया बिल?
यह कानून केंद्र सरकार द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा, जैसे
- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)
- कर्मचारी चयन आयोग (SSC)
- रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB)
- इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनल सेलेक्शन (IBPS)
- राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की परीक्षाएं (NEET, JEE, CUET आदि)
- केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों की भर्ती परीक्षाएं
- केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य सार्वजनिक परीक्षाएं
नए संशोधन में क्या-क्या प्रावधान हैं?
1. पेपर लीक करने वालों पर सख्त सजा
अगर कोई व्यक्ति पेपर लीक करता है, उत्तर कुंजी लीक करता है या परीक्षा में धांधली करता है, तो उसे,
- कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल की जेल
- 50 लाख रुपये तक जुर्माना
2. परीक्षा माफिया पर कड़ा शिकंजा
अगर कोई संगठित गिरोह या सिंडिकेट परीक्षा में धांधली करता है, तो
- कम से कम सात साल और अधिकतम 10 साल की जेल
- 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना
3. परीक्षा कराने वाली एजेंसियों पर कार्रवाई
अगर कोई एजेंसी (सर्विस प्रोवाइडर) धांधली में शामिल पाई जाती है, तो
- 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना
- 8 साल तक किसी भी सार्वजनिक परीक्षा के आयोजन से डिबार (प्रतिबंधित)
4. एजेंसी के मालिक और अधिकारियों पर भी कार्रवाई
अगर जांच में किसी कंपनी के डायरेक्टर, मैनेजर या वरिष्ठ अधिकारी की मिलीभगत सामने आती है, तो,
- कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल की जेल
- 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना
5. स्पेशल टास्क फोर्स (STF) करेगी जांच
केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर पेपर लीक और परीक्षा धांधली के मामलों की जांच स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंप सकेगी। विधेयक में प्रावधान है कि जांच दो महीने के भीतर पूरी की जाएगी।
6. फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई
- पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी।
- अदालत में रोजाना सुनवाई होगी।
- चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
- हर स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया जाएगा।
- फैसले के खिलाफ 30 दिन के भीतर हाईकोर्ट में अपील की जा सकेगी।
- कोशिश होगी कि तीन महीने के भीतर अपील का निपटारा कर दिया जाए।
2024 में लागू किए गए कानून में क्या है?
देश में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, नकल, फर्जी परीक्षा, फर्जी एडमिट कार्ड, उत्तर कुंजी लीक और परीक्षा माफिया के मामलों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 बनाया था। यह कानून 12 फरवरी 2024 को पारित हुआ और 21 जून 2024 से पूरे देश में लागू हुआ। यह देश का पहला विशेष केंद्रीय कानून है, जो केवल सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली धांधली और पेपर लीक से निपटने के लिए बनाया गया था।
यह कानून क्यों लाया गया था?
सरकार ने कानून के उद्देश्य में इसकी कई वजहें बताई थी।
1. पेपर लीक से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा था
बार-बार पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के कारण परीक्षाएं रद्द या स्थगित करनी पड़ रही थीं। इससे भर्ती और प्रवेश प्रक्रिया में देरी होती थी और लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत, समय और करियर प्रभावित हो रहा था।
2. कोई अलग केंद्रीय कानून नहीं था
सरकार ने माना कि 2024 से पहले केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली धांधली से निपटने के लिए कोई विशिष्ट केंद्रीय कानून नहीं था। ऐसे मामलों में आईपीसी, आईटी एक्ट और अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई होती थी, लेकिन परीक्षा माफिया और पेपर लीक पर केंद्रित कोई व्यापक कानून नहीं था।
3. परीक्षा माफिया पर सख्त कार्रवाई जरूरी थी
सरकार के अनुसार, कुछ संगठित गिरोह और संस्थाएं परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों का फायदा उठाकर आर्थिक लाभ के लिए पेपर लीक और अन्य धांधली कर रहे थे। इन संगठित नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई के लिए अलग कानून की जरूरत थी।
4. परीक्षा प्रणाली में भरोसा कायम रखना
इस कानून का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाना था, ताकि ईमानदारी से तैयारी करने वाले युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बना रहे।
5. राज्यों के लिए मॉडल कानून बनाना
सरकार ने कहा कि यह कानून राज्यों के लिए भी मॉडल कानून का काम करेगा। राज्य चाहें तो इसी आधार पर अपने यहां भी पेपर लीक रोकने के लिए कानून बना सकते हैं।
इस कानून के तहत किन परीक्षाओं को शामिल किया गया?
- यह कानून इन सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होता था;
- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)
- कर्मचारी चयन आयोग (SSC)
- रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB)
- इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनल सेलेक्शन (IBPS)
- नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA)
- केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों की भर्ती परीक्षाएं
- केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य सार्वजनिक परीक्षाएं
इस कानून में किन कामों को अपराध माना गया?
कानून के तहत निम्नलिखित कार्य अपराध हैं;
- प्रश्नपत्र या उत्तर कुंजी लीक करना।
- पेपर लीक की साजिश रचना या उसमें शामिल होना।
- बिना अनुमति प्रश्नपत्र या OMR शीट हासिल करना।
- परीक्षा के दौरान अवैध तरीके से उत्तर उपलब्ध कराना।
- किसी अभ्यर्थी की गैरकानूनी तरीके से मदद करना।
- उत्तर पुस्तिका या OMR शीट से छेड़छाड़ करना।
- मेरिट सूची या दस्तावेजों में हेरफेर करना।
- कंप्यूटर नेटवर्क या परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़ करना।
- फर्जी वेबसाइट बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करना।
- फर्जी परीक्षा, फर्जी एडमिट कार्ड या फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करना।
2024 के कानून में क्या सजा का प्रावधान था?
- पेपर लीक या धांधली करने वाले व्यक्ति: तीन से पांच साल की जेल और ₹10 लाख तक जुर्माना।
- सर्विस प्रोवाइडर (परीक्षा कराने वाली एजेंसी): ₹1 करोड़ तक जुर्माना, परीक्षा की लागत की वसूली और 4 साल तक डिबार।
- एजेंसी के डायरेक्टर या मैनेजमेंट: 3 से 10 साल की जेल और ₹1 करोड़ तक जुर्माना (अगर मिलीभगत साबित हो)।
- संगठित परीक्षा माफिया या गिरोह: 5 से 10 साल की जेल, कम से कम ₹1 करोड़ जुर्माना और संस्था की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान।
जांच और कानूनी प्रक्रिया
- सभी अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौता योग्य था।
- जांच डीएसपी या एसीपी रैंक से नीचे का अधिकारी नहीं कर सकता।
- केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर किसी केंद्रीय जांच एजेंसी को जांच सौंप सकती थी।
क्या इस कानून से पेपर लीक से जुड़ी समस्या का सामाधान हुआ?
- यूजीसी-नेट (जून 2024): कानून लागू होने के कुछ ही दिनों बाद परीक्षा की शुचिता पर सवाल उठने के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी और मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।
- सीएसआईआर-यूजीसी नेट (2024): यूजीसी-नेट विवाद के बाद एहतियात के तौर पर परीक्षा स्थगित करनी पड़ी, ताकि परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।
- नीट-यूजी 2026: पेपर लीक के आरोपों के बाद सीबीआई ने जांच शुरू की। बाद में परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने का फैसला लिया गया।
पेपर लीक के रिकॉर्ड पर सरकार ने क्या कहा?
सरकार ने 2024 में संसद में स्पष्ट किया था कि देश में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक या अन्य परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों का कोई केंद्रीकृत रिकॉर्ड शिक्षा मंत्रालय के पास नहीं है। सरकार के अनुसार, भर्ती और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए होने वाली परीक्षाएं अलग-अलग संस्थाएं आयोजित करती हैं। इसलिए किसी एक मंत्रालय के पास सभी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं का समेकित डेटा उपलब्ध नहीं है।
पेपर लीक को लेकर राहुल गांधी ने क्या किया दावा?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में 22 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 152 बार प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, यानी औसतन हर महीने एक पेपर लीक हुआ। उन्होंने कहा कि हर बार लाखों छात्रों को फिर से परीक्षा की तैयारी करनी पड़ती है और उन्हें दोबारा उसी मानसिक दबाव से गुजरना पड़ता है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की इस परेशानी को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि करीब 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार इन घटनाओं से प्रभावित हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की है।





