जहरीले कफ सिरप पर सख्ती: उत्पादन बंद करने से लाइसेंस निलंबन तक की हुई कार्रवाई

जहरीले कफ सिरप से हुई बच्चों की मौतों के बाद केंद्र सरकार ने दवाओं की गुणवत्ता को लेकर बड़ा अभियान चलाया है। सरकार ने दिसंबर 2022 से अब तक 1,040 से अधिक दवा निर्माण इकाइयों की जोखिम-आधारित जांच की। जांच में गड़बड़ियां मिलने पर 950 से ज्यादा इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इनमें कारण बताओ नोटिस जारी करना, उत्पादन बंद कराना, लाइसेंस निलंबित या रद्द करना और चेतावनी देना जैसे सख्त कदम शामिल हैं।

आखिर कितनी कफ सिरप कंपनियों का हुआ विशेष ऑडिट?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1,100 से अधिक कफ सिरप बनाने वाली कंपनियों का राज्यों के सहयोग से विशेष ऑडिट कराया गया। साथ ही बाजार में बिक रही कफ सिरप के नमूनों की बड़े पैमाने पर जांच की गई, ताकि घटिया या मिलावटी दवाओं की पहचान की जा सके।

जहरीले रसायनों की जांच अब क्यों होगी अनिवार्य?
सरकार ने दवा गुणवत्ता को और मजबूत बनाने के लिए इंडियन फार्माकोपिया (आईपी) 2022 में संशोधन किया है। अब बाजार में आने से पहले हर कफ सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) जैसे जहरीले रसायनों की जांच अनिवार्य होगी। यही रसायन कई देशों में बच्चों की मौतों से जुड़े कफ सिरप में पाए गए थे।
पांच वर्षों में कितनी दवाओं के नमूनों की जांच हुई?
देश में बिक रही दवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी सरकार ने विस्तृत आंकड़े जारी किए हैं। दवाओं में मिल रही गड़बड़ियों को देखते हुए जांच का दायरा लगातार बढ़ाया गया। पिछले पांच वर्षों में 5,49,352 दवाओं के नमूनों की जांच की गई।
साल-दर-साल कितना बढ़ा जांच का दायरा? 

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साल दवा नमूनों की जांच
2021-22 88,844
2022-23 96,713
2023-24 1,06,150
2024-25 1,16,323
2025-26 1,41,322

कितनी दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल हुईं?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जांचे गए नमूनों में 14,702 दवाएं निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं, जबकि 1,613 नमूने नकली या मिलावटी पाए गए। इसके बाद संबंधित दवा कंपनियों और वितरकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई।

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