कर्नाटक में गन्ना किसानों और चीनी मिल मालिकों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद गतिरोध खत्म होने की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अगुवाई में हुई बैठक में दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि केंद्र सरकार चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) तय करेगी, उसके बाद ही किसानों को गन्ने का भाव तय किया जाएगा। किसान फिलहाल 6,000 रुपये प्रति टन प्रोत्साहन राशि देने की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि किसानों और चीनी मिलों, दोनों का कामकाज चलते रहना जरूरी है। उन्होंने साफ किया कि किसानों की आजीविका राज्य सरकार के लिए बेहद अहम है। सरकार किसानों के साथ खड़ी है और उनकी मांगों को लेकर केंद्र से बातचीत करने के लिए भी तैयार है। उन्होंने कहा कि किसान और मिल मालिक समझौते के करीब पहुंच चुके हैं। दोनों पक्ष केंद्र सरकार से बात करेंगे और राज्य सरकार भी इस मामले को आगे बढ़ाएगी। शिवकुमार ने उम्मीद जताई कि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी किसानों से किए गए वादों को पूरा करेंगे।
इस मुद्दे को सुलझाने के लिए सोमवार को बेलगावी के सुवर्ण विधान सौधा और सर्किट हाउस में लंबी बैठकें हुईं। बातचीत सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई और आधी रात तक चली। इस दौरान कुल पांच दौर की चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने गतिरोध खत्म करने के लिए अलग-अलग बैठकों में हिस्सा लिया और दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की।
80 में से 79 चीनी मिलों के प्रतिनिधि पहुंचे
बैठक में राज्य सरकार के नौ मंत्री और करीब 70 विधायक शामिल हुए। इसके अलावा राज्य की 80 चीनी मिलों में से 79 के प्रतिनिधि और किसान नेता भी बातचीत में मौजूद रहे। सुवर्ण विधान सौधा में शुरुआती चर्चा के बाद शिवकुमार ने सर्किट हाउस में दो और दौर की बैठकें कीं, ताकि गन्ने की कीमत को लेकर कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके।
कई बड़े नेता भी रहे मौजूद
इन बैठकों में मंत्री सतीश जारकीहोली, लक्ष्मण सावदी और संतोष लाड के साथ विधायक यशवंतराय गौड़ा पाटिल और एन.एच. कोना रेड्डी भी शामिल हुए। किसान नेताओं और चीनी मिल मालिकों ने भी अपनी-अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में है और किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी।
फिलहाल गन्ने की कीमत को लेकर अंतिम फैसला होना बाकी है। किसान 6,000 रुपये प्रति टन प्रोत्साहन राशि की मांग पर जोर दे रहे हैं, जबकि मिल मालिक केंद्र की ओर से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य तय होने के बाद ही किसानों को दिए जाने वाले भाव पर निर्णय लेने को तैयार हैं। अगले दो दिन की बातचीत से साफ होगा कि दोनों पक्ष इस प्रस्ताव पर सहमत होते हैं या नहीं।







