मध्यप्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बन रही देश की सबसे लंबी भूमिगत जल सुरंग अब बनकर तैयार हो गई है। करीब डेढ़ दशक से चल रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण पूरा हो चुका है। टनल के ब्रेकथ्रू के साथ पहली बार बिना किसी पंप या लिफ्ट के बरगी बांध का पानी विंध्य की धरती तक पहुंचेगा। यह सिर्फ एक टनल नहीं, बल्कि विंध्य क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था बदलने वाली एतिहासिक परियोजना मानी जा रही है।
15 साल का संघर्ष… पहाड़, पानी और तकनीकी चुनौतियों पर मिली जीत
ऊंचा भूजल स्तर, अचानक बनने वाले सिंकहोल, कोरोना काल की बाधाएं और रास्ते में आई 56 बेहद कठोर चट्टानों ने निर्माण कार्य को कई बार रोक दिया। कई मौकों पर मशीन के कटर और अन्य पुर्जे बदलने पड़े। सुरक्षा के मद्देनजर सुरंग के ऊपर लगभग 20 मीटर चौड़ी भूमि का अस्थायी अधिग्रहण भी किया गया।
इस कार्य में लगातार बढ़ती चुनौतियों के कारण परियोजना की लागत 799 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 1442 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। निर्माण कार्य में कई तरह की परेशानियां आईं लेकिन कामगार श्रमिक, इंजीनियर समेत तमाम आला-अफसरों के समावेशी प्रयास ने यह जटिल कार्य पूर्ण कर लिया।
किसानों के लिए नर्मदा का पानी बनेगा नई उम्मीद
परियोजना के तहत मुख्य सुरंग के अलावा लगभग 12 किलोमीटर लंबी ओपन कैनाल और एक किलोमीटर लंबी कट-एंड-कवर संरचना भी तैयार की गई है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार टनल का निर्माण पूरा हो चुका है। अब ब्रेकथ्रू और परीक्षण की औपचारिकताओं के बाद अक्तूबर 2026 से टनल के जरिए सिंचाई और जलापूर्ति शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री करेंगे निरीक्षण
नर्मदा टनल का ब्रेकथ्रू होते ही इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साक्षी बनने के लिए 17 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्लीमनाबाद दौरे की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, वर्षों तक इस चुनौतीपूर्ण परियोजना को पूरा करने वाले इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों और कर्मचारियों का सम्मान किया जा सकता है।
हालांकि, मुख्यमंत्री के दौरे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। संभावित कार्यक्रम को देखते हुए जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग तैयारियों में जुटा हुआ है।
आशीष तिवारी (कटनी कलेक्टर) ने बताया नर्मदा टनल की खुदाई पूरी हो चुकी है। हालांकि, अभी डेढ़ माह का समय और लगेगा। चूंकि अभी रेल लाइन और बिजली संबंधित उपकरण को हटाने जैसी चीजें शेष हैं। वहीं, 17 जुलाई को मुख्यमंत्री मोहन यादव के दौरा प्रस्तावित है, जो टनल से करीब पांच किलोमीटर के दूर हेलीपैड से उतरकर पूरे टनल का निरीक्षण करेंगे।
इसके साथ ही बरगी परियोजना के तहत नर्मदा का जल छोड़ने में अभी डेढ़ माह का समय लग सकता है। रही बात नहर का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त है तो उसे भी आने वाले वक्त में दुरुस्त कर लिया जाएगा।
इस टनल के माध्यम से आने वाले बरगी बांध से विंध्य के किसानों की तस्वीर बदलेगी। यह भूमिगत जल सुरंग निर्माण का एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। इस अभियांत्रकीय लोगों का ध्यान खीच रही है। ब्रेकथ्रू चट्टानें, सिंकहोल और कोरोना… हर चुनौती पर इंजीनियरिंग भारी पड़ी है।







