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ग्वालियर में साइबर ठगी का ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रदेश को चौंका दिया है। ऑनलाइन निवेश और भारी मुनाफे का झांसा देकर शातिर साइबर ठगों ने 70 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट से 21 करोड़ 5 लाख 92 हजार रुपये ठग लिए। इसे मध्य प्रदेश में ऑनलाइन निवेश के नाम पर हुई सबसे बड़ी साइबर ठगी की घटनाओं में माना जा रहा है। राज्य साइबर सेल ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ग्वालियर के 70 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय को ऑनलाइन ट्रेडिंग और यूएसडीटी (USDT) में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया गया। शुरुआत में ठगों ने भरोसा जीतने के लिए निवेश पर अच्छा रिटर्न दिखाया, जिसके बाद पीड़ित ने लगातार बड़ी रकम निवेश कर दी।
धीरे-धीरे निवेश की राशि बढ़ते-बढ़ते 21 करोड़ 5 लाख 92 हजार रुपये तक पहुंच गई। जब पीड़ित ने अपनी रकम निकालने की कोशिश की तो ठगों ने अलग-अलग बहाने बनाकर पैसे देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। पीड़ित की शिकायत पर राज्य साइबर सेल ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। साइबर विशेषज्ञ बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन, मोबाइल नंबर और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जांच कर रहे हैं ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके।
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल करें। सोशल मीडिया, वॉट्सएप या टेलीग्राम के जरिए मिलने वाले निवेश के प्रस्तावों और असामान्य मुनाफे के दावों से सतर्क रहें। 21 करोड़ रुपये से अधिक की यह ठगी न सिर्फ ग्वालियर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में साइबर अपराध के बढ़ते खतरे की बड़ी चेतावनी है। पुलिस अब इस हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड के पीछे मौजूद नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है।
हैलो… मैं दिव्या बोल रही हूं’ से शुरू हुई चैटिंग ने मध्यप्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और सीनियर CA अशोक विजयवर्गीय को करोड़ों का चूना लगा दिया। राज्य साइबर सेल के डीएसपी संजीव नयन शर्मा ने बताया कि क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर मध्यप्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और वरिष्ठ सीए अशोक विजयवर्गीय से 21 करोड़ 6 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई है। मामले में विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि ठगों के इस्तेमाल किए गए तीन वॉट्सएप नंबर, 20 बैंक खाते और फर्जी यूआरएल ट्रेडिंग पोर्टल की तकनीकी जांच की जा रही है। संबंधित बैंक खातों को फ्रीज कराने, आईपी एड्रेस ट्रैक करने और आरोपियों तक पहुंचने के लिए साइबर सेल की टीम कार्रवाई में जुटी हुई है।